रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में आयोजित एक अहम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत नव चयनित बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) और महिला पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके भविष्य के लिए विश्वास जताया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करेंगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय के बाद इतनी बड़ी संख्या में इन पदों पर नियुक्तियां होना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने महिलाओं की बदलती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आज महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राज्य के विकास में भी अहम योगदान दे रही हैं। सरकार द्वारा की जा रही नियमित और संविदा आधारित नियुक्तियां प्रशासनिक कार्यों को गति देने में सहायक साबित हो रही हैं, और इस प्रक्रिया में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
कुपोषण के खिलाफ सामूहिक लड़ाई का आह्वान
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने राज्य में कुपोषण की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए सभी नवनियुक्त कर्मियों से इसे खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कुपोषण समाज के लिए अभिशाप के समान है और यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया, तो इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे अक्सर सामने नहीं आ पाते, जिससे छोटी समस्याएं भी गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में इन कर्मियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
दूरदराज इलाकों तक योजनाओं की पहुंच पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य के दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति और समर्पण के साथ हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उनका मानना है कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।
पारदर्शिता और बेहतर समन्वय की जरूरत
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल को आवश्यक बताते हुए कहा कि समन्वय की कमी से अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए महिला कर्मियों को मोबाइल और टैब उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया गया, जिससे संचार व्यवस्था बेहतर हो सके।
सरकार के हिस्से के रूप में निभाएं जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने नव नियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वे सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें अपने दायित्वों को ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी कई सशक्त पहलें की जाएंगी।
इस कार्यक्रम में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभागीय सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक किरण कुमार पासी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, नव नियुक्त अभ्यर्थी और उनके परिजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।