चाईबासा सदर अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही के आरोपों में घिर गया है। थैलेसीमिया से पीड़ित छह बच्चों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने के मामले के कुछ महीनों बाद अब एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में प्रसव के दौरान चढ़ाए गए संक्रमित रक्त के कारण एक महिला, उसके पति और उनके बड़े बच्चे को एचआईवी संक्रमण हुआ। यह मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यह घटना करीब तीन साल पुरानी है, लेकिन इसकी जानकारी अब जाकर सामने आई। यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद गंभीर विफलता मानी जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
पहले प्रसव के दौरान रक्त चढ़ाने से संक्रमण का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी चाईबासा सदर अस्पताल में सी-सेक्शन के माध्यम से हुई थी। उस दौरान रक्त की आवश्यकता पड़ी और अस्पताल के ब्लड बैंक से खून उपलब्ध कराया गया। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान महिला को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया। उस समय किसी तरह के लक्षण सामने नहीं आए।
जून 2025 में महिला के दूसरी बार गर्भवती होने पर रूटीन जांच कराई गई, जिसमें वह एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद पति की जांच कराई गई, तो उनमें भी संक्रमण की पुष्टि हुई।
बड़े बच्चे में भी संक्रमण, परिवार में दहशत
2 जनवरी 2026 को महिला के दूसरे बच्चे का जन्म जमशेदपुर में हुआ। इसी बीच जब उनका बड़ा बच्चा बीमार पड़ा और उसकी जांच कराई गई, तो वह भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। दंपती का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के डर से उन्होंने लंबे समय तक इस बात को छिपाए रखा। अब उन्हें आशंका है कि कहीं उनका नवजात बच्चा भी इस बीमारी की चपेट में न आ जाए।
पहले भी आ चुका है गंभीर मामला सामने
गौरतलब है कि 25 अक्टूबर 2025 को चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से ग्रसित छह बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। उस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निलंबित कर दिया गया था और एक तकनीशियन को सेवामुक्त किया गया था। प्रारंभिक जांच में अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई थी और हाईकोर्ट ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया था।
ब्लड बैंक की भूमिका पर सवाल
चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक पश्चिमी सिंहभूम जिले में रक्त आपूर्ति का एकमात्र सरकारी केंद्र है। ऐसे में बार-बार सामने आ रहे एचआईवी संक्रमण के मामलों ने इसकी जांच प्रक्रिया, रिकॉर्ड-रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सफाई और जांच
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने बताया कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों के एचआईवी पॉजिटिव होने के मामले की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संक्रमण मां से फैला या किसी अन्य स्रोत से। विभाग द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड, तारीखें और डोनरों का विवरण खंगाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि इलाज की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया, सीबीआई जांच की मांग
इस मामले पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक पहले भी एचआईवी संक्रमित रक्त के मामलों को लेकर विवादों में रहा है। उनका कहना है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। मरांडी ने आशंका जताई कि इस चूक के कारण और भी लोग संक्रमित हो सकते हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने न केवल सदर अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाई है।