झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सख्त कदम उठाते हुए भू-अर्जन विभाग से जुड़े दो लोगों को रिश्वत के आरोप में रंगेहाथ पकड़ लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विभाग के बड़ा बाबू प्रीतम आचार्य और एक कथित बिचौलिया विनय तिवारी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है।
एसीबी को लंबे समय से भू-अर्जन विभाग में अवैध लेनदेन की शिकायतें मिल रही थीं। इसी क्रम में टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को उपायुक्त की मौजूदगी में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित थी, जिसमें प्रीतम आचार्य भी शामिल थे। बैठक के दौरान उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसके बाद वे बाहर चले गए। आरोप है कि इसी दौरान उन्होंने रिश्वत लेने की कोशिश की।
एसीबी की टीम पहले से निगरानी में थी और मौके का इंतजार कर रही थी। जैसे ही कथित लेनदेन शुरू हुआ, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रीतम आचार्य को पकड़ लिया। इसके साथ ही गम्हरिया प्रखंड कार्यालय के निकट विनय तिवारी को भी हिरासत में लिया गया, जो कथित रूप से नकदी के साथ अपनी गाड़ी में मौजूद था।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक बड़े सौदे से संबंधित बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस डील की कुल राशि करीब 40 लाख रुपये तय हुई थी, जिसमें शुरुआती भुगतान के तौर पर लगभग 5 लाख रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। झारखंड एसीबी के एसपी श्रीराम सामद जमशेदपुर स्थित कार्यालय पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की पहचान करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।