झारखंड में अब रेलवे कोचों और प्लेटफॉर्म के ओवरब्रिज में उपयोग होने वाली टिकाऊ, फिसलनरोधी और उच्च घर्षण क्षमता वाली चेकर स्टील प्लेटें (chequered steel plates) का निर्माण संभव हो गया है। सेल (SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने घरेलू इस्पात उत्पादन को नई दिशा देते हुए पहली बार सफलतापूर्वक चेकर प्लेट रोलिंग ऑपरेशन पूरा किया है। इस उपलब्धि के साथ बीएसएल अब उस बाजार में प्रवेश कर चुका है, जहां अब तक केवल छोटे रोलिंग मिल और मिनी स्टील प्लांट ही सक्रिय थे।
बीएसएल का रणनीतिक उद्देश्य
यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत बीएसएल के रणनीतिक विजन को दर्शाती है। कार्यकारी निदेशक प्रिय रंजन और एके दत्त के नेतृत्व में टीम ने ऐसा उत्पाद विकसित किया है, जिसे अब तक देश के किसी बड़े इस्पात संयंत्र ने व्यावसायिक रूप से नहीं बनाया था।
चेकर प्लेट का महत्व
चेकर प्लेटें फिसलनरोधी और मजबूत सतह प्रदान करती हैं। इनका इस्तेमाल सीढ़ियों, रैंप, प्लेटफॉर्म, ट्रक और ट्रेलर बेड, शिप डेक, पेट्रोकेमिकल उद्योग, मशीनरी प्लेटफॉर्म और आर्किटेक्चरल डिज़ाइन में भी किया जाता है।
तकनीकी दक्षता से हासिल सफलता
पहले ट्रायल में बीएसएल ने 1,250 मिमी से 1,500 मिमी चौड़ाई और 5-6 मिमी मोटाई वाली 12 चेकर प्लेट कॉइल्स का सफल रोलिंग किया। पूरा ऑपरेशन टीम ने अपने संसाधनों और तकनीकी कौशल से किया, जिसमें मशीन सेटअप, उत्पादन योजना और निरंतर निगरानी शामिल थी। अधिकारियों ने इसे उत्पादन पोर्टफोलियो विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राष्ट्रीय मांग और आर्थिक महत्व
देश में चेकर प्लेट की वार्षिक मांग लगभग 3.6 लाख टन है। बीएसएल हर महीने 30,000 टन उत्पादन का लक्ष्य रख रहा है, जो नियमित एचआर कॉइल ऑर्डर के अतिरिक्त होगा। आर्थिक दृष्टि से भी यह लाभकारी है क्योंकि चेकर प्लेट प्रति टन एचआर कॉइल की तुलना में लगभग 1,500 रुपये अधिक लाभ देती है।
इतिहास में एक दशक बाद वापसी
पूर्व में सेल के राउरकेला स्टील प्लांट (RSP) ने चेकर प्लेट का उत्पादन किया था, लेकिन लगभग एक दशक पहले इसे बंद कर दिया गया था। वर्तमान में देश में यह तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता केवल बोकारो स्टील प्लांट ने ही प्रदर्शित की है।
बीएसएल के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने बताया, “बोकारो स्टील प्लांट में पहली बार हॉट स्ट्रीप मिल में चेकर प्लेट की रोलिंग पूरी तरह इन-हाउस की गई, बिना किसी बाहरी सहयोग के। यह टीमवर्क, तकनीकी दक्षता और समर्पण का परिणाम है।”
संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और बोकारो स्टील ऑफिसर एसोसिएशन (BSOA) ने इस उपलब्धि को मील का पत्थर बताते हुए टीम को बधाई दी। बीएसएल की इस सफलता से न केवल बोकारो बल्कि पूरे देश के स्टील सेक्टर को मजबूती मिलेगी।