भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड की गठबंधन सरकार पर प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य में नौकरशाही पर सरकार की पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है, जिसके कारण प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदीप सिन्हा ने कहा कि हाल के समय में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि वरिष्ठ अधिकारियों पर सरकार के निर्देशों का अपेक्षित प्रभाव नहीं रह गया है। उनके अनुसार, मंत्रियों की बातों की अनदेखी और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने देवघर में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ पुलिस अधीक्षक के व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू द्वारा अधिकारियों को किए गए फोन का जवाब तक नहीं दिया गया, जो जनप्रतिनिधियों के प्रति असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासन का राजनीतिक उपयोग पहले भी होता रहा है। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताया और कहा कि आज भी उसी सोच का प्रभाव प्रशासनिक तंत्र में दिखाई देता है।
प्रदीप सिन्हा ने कहा कि संविधान ने विधायिका और कार्यपालिका की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से संवाद करते हैं, इसलिए अधिकारियों को संवैधानिक दायित्वों, जवाबदेही और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा होती रही तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता का भरोसा दोनों प्रभावित होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब एक महीने से मंत्रियों और अधिकारियों के बीच सामने आ रहे मतभेदों पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि राज्य का प्रशासन सरकार के निर्देशों के अनुसार चलेगा या अधिकारियों की स्वतंत्र कार्यशैली के आधार पर। पार्टी का आरोप है कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री की चुप्पी प्रशासनिक अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
भाजपा ने राज्य सरकार से प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की। प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग के सह-संयोजक अजय राय और नीरज सिंह भी मौजूद रहे।