झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को राजनीतिक माहौल गर्म हो गया, जब मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक विधानसभा परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। इस दौरान विशेष रूप से छात्रों को लंबित छात्रवृत्ति भुगतान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने राज्य सरकार पर कई मोर्चों पर असफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कल्याण विभाग के माध्यम से छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति लंबे समय से लंबित है, लेकिन सरकार इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंईयां सम्मान योजना के नाम पर महिलाओं को पहले लाभ का भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए गए। उनके अनुसार सरकार की नीतियों से महिलाएं और छात्र दोनों ही ठगा महसूस कर रहे हैं।
वहीं भाजपा विधायक पूर्णिमा दास ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति की समस्या से छात्र परेशान हैं, जबकि राज्य सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। उनके मुताबिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति का खर्च राज्य सरकार को उठाना होता है, लेकिन सरकार इस जिम्मेदारी से बचने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य में परीक्षाओं का आयोजन समय पर क्यों नहीं हो रहा और छात्रों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा।
पूर्णिमा दास ने कांग्रेस के हालिया प्रदर्शनों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी कर रखी है। उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाया कि उसने 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा किया था, जिसे अब भुला दिया गया है।
इसके अलावा भाजपा विधायक ने राज्य सरकार द्वारा हाल में खरीदी गई पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इन वाहनों का इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बजाय प्रचार के लिए किया जा रहा है और उन्हें बेवजह सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार की नीतियों से महिलाओं, छात्रों, युवाओं और किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण वे सरकार के खिलाफ आवाज उठाने को मजबूर हैं। विधानसभा परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के चलते बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।