झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर कड़ा प्रहार करते हुए उनके राजनीतिक आचरण और रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
पांडेय ने कहा कि मरांडी लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक गरिमा दोनों प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मरांडी हर मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने की प्रवृत्ति के चलते संतुलन खो बैठे हैं और “मिशन-11” के नाम पर असामान्य राजनीतिक व्यवहार कर रहे हैं।
हाल ही में एक पुलिस अधिकारी द्वारा अनुचित भाषा के प्रयोग के मामले का जिक्र करते हुए पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को पद से हटा दिया, जो प्रशासन की जवाबदेही का उदाहरण है। इसके बावजूद मरांडी द्वारा इस कार्रवाई पर आपत्ति जताना यह दर्शाता है कि वे हर स्थिति में केवल विरोध की राजनीति करना चाहते हैं।
जेएमएम नेता ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा भी अब मरांडी से कम होता दिख रहा है। उन्होंने दावा किया कि चर्चा में बने रहने के लिए मरांडी बार-बार राजभवन का रुख करते हैं और पुराने मुद्दों को दोहराकर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।
पांडेय ने आगे कहा कि पार्टी के अंदर भी मरांडी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कार्यकर्ता मजाक में उनके हटने पर जश्न मनाने की बातें करते हैं।
चुनावी प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए पांडेय ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, लेकिन मरांडी को प्रमुख चेहरा बनाए जाने के बाद 2024 में यह संख्या घटकर 21 रह गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीते वर्षों में मरांडी किसी उपचुनाव में पार्टी को जीत नहीं दिला सके, बावजूद इसके उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
पांडेय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले चुनावों में भाजपा की सीटें और घट सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मरांडी का अधिक समय राजभवन के चक्कर लगाने, पुराने विवादों को उठाने और अधिकारियों पर दबाव बनाने में बीत रहा है, जिससे जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
अंत में पांडेय ने मरांडी से स्पष्ट करने की मांग की कि उनका वास्तविक राजनीतिक एजेंडा क्या है और वे झारखंड की जनता के लिए किस दिशा में काम करना चाहते हैं।