ऑडिट में खुली बिजली वितरण कंपनी की पोल, उपभोक्ताओं की जमा राशि का नहीं मिला पूरा हिसाब

ऑडिट में खुली बिजली वितरण कंपनी की पोल, उपभोक्ताओं की जमा राशि का नहीं मिला पूरा हिसाब

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 17, 2025, 1:32:00 PM

बिजली वितरण कंपनी एक बार फिर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कटघरे में है। ताजा ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि कंपनी के पास उपभोक्ताओं से ली गई सुरक्षा जमा राशि और उस पर देय ब्याज का पूरा और स्पष्ट ब्योरा मौजूद ही नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1,472.14 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा राशि में से केवल 936.23 करोड़ रुपये का ही रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सका, जबकि शेष 535.91 करोड़ रुपये के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। यही नहीं, उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज के 764.34 करोड़ रुपये का भी उपभोक्ता-वार प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। कनेक्शन कट चुके उपभोक्ताओं को 3.64 करोड़ रुपये लौटाने का दावा किया गया है, लेकिन इसका भी पार्टीवार विवरण ऑडिट में नहीं पाया गया।

ऑडिट रिपोर्ट में बिजली खरीद से जुड़े खर्चों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। कंपनी ने बिजली खरीद पर 9,189.28 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इसमें से 2,217.43 करोड़ रुपये के खर्च का कोई स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा अन्य गैर-चालू देनदारियों में 355.70 करोड़ रुपये की राशि का भी पूरा विवरण नहीं दिया गया।

कंपनी की संपत्तियों के रखरखाव पर भी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। ऑडिट में बताया गया है कि अचल परिसंपत्तियों का समुचित रजिस्टर नहीं रखा गया और न ही उनका भौतिक सत्यापन किया गया। भूमि और भवन से जुड़े अधिकार, स्वामित्व और हितों की स्थिति भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं की गई है।

प्रीपेड मीटर से जुड़े मामलों में भी अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रीपेड मीटर लगाए जाने पर सुरक्षा जमा राशि को बकाया में समायोजित किया गया, जिससे सुरक्षा जमा देय राशि और उपभोक्ता बकाया दोनों में कमी दिखाई गई। जो राशि समायोजित नहीं हो सकी, उसे ग्राहक वॉलेट बैलेंस में स्थानांतरित कर “उपभोक्ताओं से अग्रिम” के रूप में दर्शाया गया।

इसके अलावा मूल्यह्रास की गणना इंड एएस 36 के मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, जबकि उधार लागत को आनुपातिक आधार पर पूंजीकृत किया गया, जो इंड एएस 23 के प्रावधानों के खिलाफ है। सुरक्षित ऋण के मामलों में भी गिरवी रखी गई संपत्तियों का समुचित विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया।

निर्माणाधीन कार्य (सीडब्ल्यआइपी) की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही। कुल 1,55,996.05 लाख रुपये की सीडब्ल्यआइपी राशि में से 740.90 लाख रुपये का योजनावार विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही ओवरहेड्स और आकस्मिक व्यय को सीडब्ल्यआइपी में पूंजीकृत भी नहीं किया गया।