चास नगर निगम में नियुक्ति विवाद तेज, लेखपाल पद को लेकर मेयर और कर्मचारी आमने-सामने

चास नगर निगम में नियुक्ति विवाद तेज, लेखपाल पद को लेकर मेयर और कर्मचारी आमने-सामने

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 25, 2026, 4:04:00 PM

चास नगर निगम में लेखपाल के पद पर कार्यरत सोमेन कुमार मंडल की नियुक्ति को लेकर विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक ओर मेयर भोलू पासवान उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं मंडल अपने चयन को पूरी तरह वैध बताते हुए आरोपों को खारिज कर रहे हैं। इस टकराव ने निगम के भीतर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

सोमेन मंडल का कहना है कि उनका चयन वर्ष 2016 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ था। उनके अनुसार, जुलाई 2016 में जारी विज्ञापन के आधार पर अक्टूबर में इंटरव्यू आयोजित किया गया, जिसमें कई उम्मीदवारों के बीच उन्हें चुना गया। नियुक्ति के बाद उनके कामकाज से संतुष्ट होकर निगम बोर्ड ने 2017 में उनका वेतन भी बढ़ाया था। मंडल का दावा है कि यदि उनकी नियुक्ति में कोई त्रुटि होती, तो उस समय यह निर्णय नहीं लिया जाता। मौजूदा आरोपों से वे मानसिक दबाव में होने की बात भी कह रहे हैं।

दूसरी तरफ, मेयर भोलू पासवान इस नियुक्ति को नियमों के अनुरूप नहीं मानते। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और जरूरी प्रशासनिक अनुमति भी नहीं ली गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में मंडल को एक अलग कार्य के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में उन्हें लेखपाल के पद पर पदस्थापित कर दिया गया, जो नियमानुसार उचित नहीं है। इसी आधार पर उनकी सेवा समाप्त करने की मांग की जा रही है।

विवाद के बढ़ने के बीच निगम कार्यालय के कुछ अहम दस्तावेजों को सील कर दिया गया है, जिससे दैनिक प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर असहज माहौल बना हुआ है।

इस पूरे प्रकरण पर बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी कर्मचारी को हटाने का निर्णय नहीं लिया गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और सभी संबंधित पक्षों को मर्यादा में रहकर काम करने को कहा गया है।

इधर, लगातार दबाव का सामना कर रहे सोमेन मंडल ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उच्च न्यायालय ने नगर निगम को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और तब तक मंडल को उनके पद पर बने रहने की अनुमति दी है। मंडल ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करने की मंशा से यह विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि मेयर लगातार पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही अवैध करार दे रहे हैं।

फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।