देशभर में विरोध के बीच UGC नियम 2026 पर केंद्र की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया

देशभर में विरोध के बीच UGC नियम 2026 पर केंद्र की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 28, 2026, 11:17:00 AM

यूजीसी नियम 2026 को लेकर देशभर में जारी विरोध और राजनीतिक खींचतान के बीच केंद्र सरकार की ओर से पहली स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नए यूजीसी प्रावधानों का मकसद केवल समानता को मजबूत करना है और इन नियमों के तहत न तो किसी वर्ग के साथ अन्याय होगा और न ही किसी को इनका गलत इस्तेमाल करने दिया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब यूजीसी के नए नियमों पर सवर्ण समाज से जुड़े कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है और कई राज्यों में प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। सियासी हलकों में इसे भाजपा के पारंपरिक समर्थक वर्ग से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे पार्टी के लिए असहज स्थिति बनने की चर्चाएं भी तेज हैं।

सरकार का कहना है कि नए यूजीसी नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर सुनिश्चित करना और जाति आधारित भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित व प्रभावी कार्रवाई करना है। इसके तहत देश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। इन समितियों में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इसके साथ ही हर शिक्षण संस्थान में समान अवसर केंद्र (इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर – EOC) की स्थापना भी जरूरी कर दी गई है। यह केंद्र वंचित वर्गों के लिए संचालित योजनाओं की निगरानी करेगा और छात्रों को शिक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक समस्याओं से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन देगा। जिन संस्थानों में समिति के लिए पर्याप्त सदस्य उपलब्ध नहीं होंगे, वहां संबंधित विश्वविद्यालय का EOC यह जिम्मेदारी संभालेगा।

नियमों में यह भी प्रावधान है कि किसी भी शिकायत के मिलने के 24 घंटे के भीतर समिति की बैठक बुलानी होगी और निर्धारित समयसीमा के अंदर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को यूजीसी की विभिन्न योजनाओं से वंचित किए जाने का प्रावधान भी रखा गया है।

इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। कुल मिलाकर, यूजीसी नियम 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच शिक्षा मंत्री का यह बयान सरकार की उस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें समानता के लक्ष्य को बनाए रखते हुए किसी भी वर्ग में असंतोष पैदा न होने देने का संदेश दिया गया है।