झारखंड की राजधानी रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स से जुड़ी जमीन के कथित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अहम कार्रवाई करते हुए चार लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी कागजात तैयार कर अधिग्रहित भूमि की अवैध खरीद-बिक्री को अंजाम दिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मामले में रांची स्थित एसीबी थाना में 5 जनवरी 2026 को कांड संख्या 1/2026 दर्ज किया गया था। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं; 318, 336, 338, 340, 61 और 49 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और इसके संशोधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान साक्ष्य मिलने के बाद जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक (दोनों रांची के सदर क्षेत्र निवासी), राजेश कुमार झा (सदर, रांची) तथा चैतन कुमार (तोरपा, जिला खूंटी) शामिल हैं। एसीबी की जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने जाली वंशावली तैयार कर खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी दिखाया और उसी आधार पर रिम्स की अधिग्रहित भूमि की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की। इस प्रक्रिया में सरकारी जमीन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। ब्यूरो के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।