झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस प्रकरण में विनय चौबे, उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता, विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के अलावा विनय चौबे के साले, सरहज और ससुर भी जांच के दायरे में हैं।
अब तक की जांच और पूछताछ के आधार पर ACB का कहना है कि विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता जांच एजेंसी को सहयोग देने के बजाय तथ्यों को टालने, अस्पष्ट जवाब देने और वास्तविक वित्तीय स्थिति को छिपाने का प्रयास कर रही हैं। एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई अहम आर्थिक सवालों पर उन्होंने न तो स्पष्ट जानकारी दी और न ही आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए।
ACB अधिकारियों का कहना है कि स्वप्ना संचिता से जब उनके व्यवसाय, बैंक खातों, कंपनियों, संपत्तियों और निवेश से संबंधित सीधे प्रश्न पूछे गए, तो अधिकतर मामलों में उन्होंने “याद नहीं है”, “बाद में देखेंगे”, “कागजात ढूंढने होंगे” या “किसी और से पूछिए” जैसे जवाब दिए। यह रवैया केवल एक-दो मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर उस बिंदु पर देखने को मिला, जहां आय के स्रोत, धन के उपयोग या वास्तविक स्वामित्व की जानकारी स्पष्ट हो सकती थी। ACB का मानना है कि यह स्थिति जानकारी की कमी नहीं, बल्कि जांच से बचने की एक रणनीति हो सकती है।
जांच के दौरान स्वप्ना संचिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने अप्रैल 2006 में अपना व्यवसाय शुरू किया था, लेकिन उसी अवधि की इनकम टैक्स रिटर्न (वित्तीय वर्ष 2006–07) न तो उपलब्ध कराई गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उस समय रिटर्न दाखिल की गई थी या नहीं। जबकि उन्होंने दावा किया कि उस दौर में उनकी आय थी, क्योंकि सर्विस टैक्स रिटर्न दाखिल किए गए, कार्यालय किराये पर लिया गया और TIME जैसे संस्थान के साथ समझौता भी हुआ।
रिकॉर्ड संधारण को लेकर भी उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया। कभी उन्होंने कहा कि केवल पांच साल का ही डेटा सुरक्षित रखा जाता है, फिर यह दावा किया कि कोई रिकॉर्ड नष्ट नहीं किया गया और इस संबंध में कोई लिखित नीति नहीं है। डिजिटल बैक-अप के विषय में भी उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
ACB का मानना है कि पुराने वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने के पीछे उद्देश्य पूर्व के लेन-देन, फीस कलेक्शन और नकद ट्रांजेक्शन की जांच से बचना हो सकता है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि व्यक्तिगत खातों, पारिवारिक लेन-देन और कंपनियों या फर्मों के खातों के बीच कोई स्पष्ट वित्तीय विभाजन नहीं रखा गया था। गंभीर सवालों पर बार-बार “फैमिली ट्रांजेक्शन” या “प्राइवेट कंपनी का मामला” जैसे सामान्य जवाब दिए गए।
एजेंसी के अनुसार, इन सभी तथ्यों ने जांच को और गहरा कर दिया है और आने वाले दिनों में पूछताछ व दस्तावेजी सत्यापन के जरिए पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों की परतें खोली जाएंगी।