जरूरत की खबर : अब पुराने जन्म प्रमाणपत्र के लिए लगाने पड़ेंगे दो-दो दफ्तरों के चक्कर!

जरूरत की खबर : अब पुराने जन्म प्रमाणपत्र के लिए लगाने पड़ेंगे दो-दो दफ्तरों के चक्कर!

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 19, 2026, 5:34:00 PM

केंद्र सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल में किए गए तकनीकी बदलावों का असर रांची नगर निगम की जन्म प्रमाणपत्र संबंधी सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से पुराने जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़े नए आवेदन, संशोधन और नए प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। नगर निगम का कहना है कि नई व्यवस्था को पूरी तरह समझने और तकनीकी प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने के बाद ही दोबारा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

नगर निगम के अनुसार, हाल ही में सीआरएस पोर्टल में बिना पूर्व सूचना बड़े बदलाव लागू किए गए हैं। इन परिवर्तनों के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों को नई प्रणाली के अनुरूप कार्य करने में दिक्कत आ रही है। साथ ही आवश्यक प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने से पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

इसका सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ रहा है जिन्हें पासपोर्ट, स्कूल-कॉलेज में नामांकन, सरकारी योजनाओं, नौकरी या अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की आवश्यकता है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग नगर निगम पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया बाधित होने के कारण उन्हें बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया 1 जुलाई से फिर शुरू किए जाने की योजना है। हालांकि नई व्यवस्था के तहत पुराने जन्म प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवेदकों को केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के संबंधित कार्यालयों से भी संपर्क करना पड़ सकता है। इससे खासकर दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों पर समय और खर्च दोनों का अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका है।

सबसे बड़ी चुनौती पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन माना जा रहा है। दरअसल, कुछ वर्ष पहले जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में प्रज्ञा केंद्रों की भी भागीदारी थी। उस समय जारी किए गए कई प्रमाणपत्रों का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन जिला सांख्यिकी पदाधिकारी (डीएसओ) कार्यालय के माध्यम से कराया जा सकता है, जिससे पूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी हो सकती है।

नगर निगम का कहना है कि जिन प्रमाणपत्रों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है, उनके मामलों में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। लेकिन जिन रिकॉर्ड का डेटा उपलब्ध नहीं है, वहां जांच और सत्यापन में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसी कारण फिलहाल आवेदन लेना स्थगित कर नई प्रणाली को समझने और आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।

इधर, नगर निगम में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया टोकन सिस्टम भी फिलहाल प्रभावी नहीं रह गया है। जानकारी के अनुसार, टोकन जारी करने वाली मशीन खराब है और टोकन नंबर प्रदर्शित करने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड भी काम नहीं कर रहे हैं। परिणामस्वरूप लोगों को फिर से काउंटरों के सामने लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

रांची नगर निगम की एएमसी सह रजिस्ट्रार निहारिका तिर्की ने बताया कि सीआरएस पोर्टल में हुए तकनीकी बदलावों को लेकर संबंधित विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। फिलहाल पूरी प्रक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है ताकि नई व्यवस्था के अनुरूप काम शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से आवेदन लेने की तैयारी की जा रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों का रिकॉर्ड नगर निगम के पास मौजूद है, उनका सत्यापन अपेक्षाकृत आसान रहेगा, जबकि पुराने और अनुपलब्ध रिकॉर्ड वाले मामलों में अतिरिक्त जांच की आवश्यकता पड़ सकती है। तब तक नागरिकों को पुराने जन्म प्रमाणपत्रों से संबंधित कार्यों के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।