आरोपों से बरी होने के बाद तीन वरिष्ठ अफसरों को मिला प्रमोशन, सरकार ने भूतलक्षी प्रभाव से दी पदोन्नति

आरोपों से बरी होने के बाद तीन वरिष्ठ अफसरों को मिला प्रमोशन, सरकार ने भूतलक्षी प्रभाव से दी पदोन्नति

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 17, 2026, 1:42:00 PM

झारखंड सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को लंबी प्रतीक्षा के बाद पदोन्नति का लाभ प्रदान किया है। विभागीय जांचों और न्यायिक मामलों के कारण वर्षों से लंबित उनके प्रमोशन प्रस्ताव बंद लिफाफे (सीलबंद कवर) में रखे गए थे। अब संबंधित मामलों में राहत मिलने के बाद सरकार ने इन अधिकारियों को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से पदोन्नति देने का निर्णय लिया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, जय बर्द्धन कुमार, गुलाम समदानी और विनोद कुमार को उनके-उनके मामलों में आरोपमुक्त पाए जाने के बाद पदोन्नति का लाभ दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें उनके कनिष्ठ अधिकारियों के समान पदोन्नति तिथि का लाभ भी उपलब्ध कराया गया है।

जय बर्द्धन कुमार पर चतरा जिले के हंटरगंज अंचल में पदस्थापना के दौरान खनन पट्टे से जुड़े एक मामले में आरोप लगे थे। उन पर वन भूमि संबंधी तथ्यों को छिपाकर खनन अनुशंसा करने का आरोप था। हालांकि, मई 2026 में उन्हें इन आरोपों से राहत मिलने के बाद विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें पदोन्नति के योग्य माना। इसके आधार पर उन्हें 30 अप्रैल 2026 से प्रभावी संयुक्त सचिव श्रेणी (पे मैट्रिक्स लेवल-13) में वैचारिक पदोन्नति प्रदान की गई है। साथ ही उनके वर्तमान पद को भी संयुक्त सचिव स्तर के अनुरूप उन्नत किया गया है।

गुमला में जिला आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में कार्यकाल के दौरान राशन कार्ड वितरण से जुड़े एक मामले में गुलाम समदानी पर लापरवाही और पात्रता संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच पूरी होने के बाद राज्य सरकार ने 11 मई 2026 को उन्हें दोषमुक्त घोषित कर दिया। इसके बाद उन्हें भी उनकी कनिष्ठ अधिकारी मनीषा तिर्की के बराबर 30 अप्रैल 2026 से संयुक्त सचिव कोटि (लेवल-13) में पदोन्नति देने का आदेश जारी किया गया। पदोन्नति के बाद उन्हें वर्तमान पद पर ही बनाए रखा गया है।

विनोद कुमार का मामला सबसे लंबे समय तक अटका रहा। हजारीबाग में जिला परिवहन पदाधिकारी रहते हुए वे वर्ष 2014 के एक रिश्वत मामले में आरोपी बनाए गए थे। बाद में न्यायालय से बरी होने और विभागीय स्तर पर भी क्लीन चिट मिलने के बावजूद उनकी पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। कारण यह था कि उनकी संपत्ति विवरणी से संबंधित औपचारिकताओं के आधार पर दो बार उनके सीलबंद कवर को अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

मामला हाईकोर्ट पहुंचने और अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद सरकार ने पुनर्विचार किया। अंततः उन्हें उनके कनिष्ठ अधिकारी चंद्र भूषण सिंह के समान 11 जनवरी 2016 से प्रभावी अपर समाहर्ता (पे मैट्रिक्स लेवल-12) पद पर वैचारिक पदोन्नति देने की मंजूरी प्रदान की गई।

इन तीनों मामलों में विभागीय और कानूनी अड़चनों के समाप्त होने के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को उनके कनिष्ठों के बराबर पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित पदोन्नति विवादों का समाधान हुआ है और संबंधित अधिकारियों को सेवा अवधि के अनुरूप पदोन्नति अधिकार प्राप्त हो सके हैं।