लेक्चरर बहाली को लेकर सदन में तीखी बहस, मंत्री बोले-जिसे आपत्ति है वह कोर्ट जा सकता है

लेक्चरर बहाली को लेकर सदन में तीखी बहस, मंत्री बोले-जिसे आपत्ति है वह कोर्ट जा सकता है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 09, 2026, 4:18:00 PM

झारखंड विधानसभा में सोमवार को राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में लेक्चररों की नियुक्ति को लेकर जोरदार चर्चा हुई। घंटी आधारित कार्यरत शिक्षकों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप चल रही है और इसमें किसी प्रकार की त्रुटि नहीं हुई है।

विधानसभा में यह मुद्दा विधायक प्रदीप यादव द्वारा उठाए गए सवाल के बाद सामने आया। मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य योग्य और सक्षम शिक्षकों का चयन करना है, इसलिए भर्ती प्रक्रिया को खुली प्रतिस्पर्धा के आधार पर रखा गया है। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का पूरा अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया में कोई प्रक्रियात्मक गलती नहीं की जा रही है।

वहीं विधायक प्रदीप यादव ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘नीड बेस्ड’ लेक्चररों को दिए जाने वाले अंक बहुत कम निर्धारित किए गए हैं। उनके मुताबिक इसी वजह से कई योग्य उम्मीदवार आवेदन करने की स्थिति में नहीं आ पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही सरकार इस मुद्दे को स्वीकार नहीं कर रही हो, लेकिन यदि मामला अदालत में जाता है और वहां से आदेश आता है, तो नियमों में बदलाव करना पड़ेगा।

प्रदीप यादव ने अपने तर्क के समर्थन में बिहार और हरियाणा में हुई नियुक्तियों का उदाहरण भी दिया। इस पर मंत्री सुदिव्य सोनू ने जवाब देते हुए कहा कि हर राज्य अपनी जरूरतों और नीतियों के आधार पर नियम बनाता है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि बिहार के नियम ही यहां लागू करने होते, तो झारखंड को अलग राज्य बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

इस मुद्दे पर सदन में हुई बहस के दौरान सरकार ने अपनी नियुक्ति प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि योग्य उम्मीदवारों को मौका देने के लिए पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी व्यवस्था अपनाई गई है।