1.38 लाख करोड़ का बजट, लेकिन जनता तक पहुंचा सिर्फ 7.9% खर्च

1.38 लाख करोड़ का बजट, लेकिन जनता तक पहुंचा सिर्फ 7.9% खर्च

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 27, 2026, 2:01:00 PM

झारखंड सरकार के चालू वित्तीय वर्ष के बजट के क्रियान्वयन की तस्वीर चिंताजनक नजर आ रही है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि विभागों को बड़ी मात्रा में वित्तीय स्वीकृतियां और आवंटन मिलने के बावजूद विकास योजनाओं पर वास्तविक खर्च बेहद सीमित रहा है। कुल 1,38,801.77 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट में अब तक केवल 10,973.39 करोड़ रुपये का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है, जो पूरे बजट का लगभग 7.9 प्रतिशत है।

वित्तीय प्रगति के अनुसार, विभिन्न विभागों के लिए 77,024.09 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है। इसके बाद 46,674.78 करोड़ रुपये डीडीओ स्तर पर जारी किए गए और ट्रेजरी से 40,972.47 करोड़ रुपये निकाले भी गए। इसके बावजूद अधिकांश राशि योजनाओं पर खर्च नहीं हो सकी। औद्योगिक विकास के लिए निर्धारित 501.30 करोड़ रुपये में से सिर्फ 10.05 करोड़ रुपये का ही उपयोग हुआ।

सबसे बड़ा बजट महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को मिला, जिसके लिए 20,238.41 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। प्रशासनिक स्वीकृति लगभग पूरी राशि की मिल गई, लेकिन वास्तविक खर्च 1,216.49 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहा।दूसरी ओर, ऊर्जा विभाग ने अपने आवंटन का बड़ा हिस्सा उपयोग किया। विभाग के 11,197.89 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 1,923.07 करोड़ रुपये का आवंटन मिला, जिसमें से 1,876.97 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

शिक्षा क्षेत्र में खर्च की रफ्तार धीमी

शिक्षा विभाग के विभिन्न प्रभागों में भी व्यय अपेक्षा से काफी कम रहा। स्कूली शिक्षा के तहत 9,485.01 करोड़ रुपये के बजट में से 1,555.53 करोड़ रुपये खर्च हुए। माध्यमिक शिक्षा प्रभाग ने 4,909.72 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 581.97 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उच्च शिक्षा प्रभाग में 1,949.81 करोड़ रुपये के प्रावधान के बावजूद केवल 92.05 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ। तकनीकी शिक्षा में 479.65 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले खर्च सिर्फ 26.03 करोड़ रुपये रहा।

गृह विभाग के तहत पुलिस व्यवस्था के लिए 8,910.06 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है, जिसमें अब तक 1,570.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके विपरीत आपदा राहत के लिए 1,173.47 करोड़ रुपये के प्रावधान में से महज 2.75 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।

ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे की योजनाएं भी पीछे

ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 4,156.74 करोड़ रुपये के बजट में से 1,293.89 करोड़ रुपये खर्च हुए। मुख्य सड़कों के लिए 6,301.28 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 369.31 करोड़ रुपये का ही उपयोग हुआ। भवन निर्माण विभाग ने 794.31 करोड़ रुपये के बजट में से 108.27 करोड़ रुपये खर्च किए।

वहीं ग्रामीण विकास विभाग का 7,845.93 करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद वास्तविक खर्च केवल 55.13 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 5,980.30 करोड़ रुपये के बजट में से 587.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं हर घर जल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं वाले पेयजल विभाग ने 3,994.53 करोड़ रुपये के बजट में से केवल 38.87 करोड़ रुपये ही खर्च किए।

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में भी खर्च की रफ्तार बेहद धीमी रही। कृषि प्रभाग ने 2,106.36 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 23.93 करोड़ रुपये, पशुपालन ने 624.83 करोड़ रुपये में से 35.55 करोड़ रुपये, सहकारिता ने 962.11 करोड़ रुपये में से 14.33 करोड़ रुपये, मत्स्य विभाग ने 220.17 करोड़ रुपये में से 8.75 करोड़ रुपये, जबकि डेयरी विकास प्रभाग ने 434.58 करोड़ रुपये के बजट में से मात्र 1.67 करोड़ रुपये खर्च किए।

कर्ज, पेंशन और कल्याण योजनाओं में भी कम प्रगति

सरकारी ऋण भुगतान के लिए 9,108.17 करोड़ रुपये निर्धारित हैं, लेकिन अब तक केवल 33.24 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। ब्याज भुगतान मद में 6,519.96 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 19.95 करोड़ रुपये खर्च हुए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि 9,967.40 करोड़ रुपये के पेंशन बजट में वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक खर्च शून्य दर्ज किया गया।

अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए 2,199.22 करोड़ रुपये के बजट में से 44.87 करोड़ रुपये खर्च हुए। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 318.98 करोड़ रुपये के बजट में से 6.47 करोड़ रुपये, जबकि श्रम एवं कौशल विकास विभाग ने 1,128.73 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 22.12 करोड़ रुपये का उपयोग किया।

बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,121.82 करोड़ रुपये के बजट में से 574.27 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि लघु सिंचाई योजनाओं में 392.89 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 18.66 करोड़ रुपये ही उपयोग किए गए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मद में 883.25 करोड़ रुपये के बजट में से 53.92 करोड़ रुपये खर्च हुए।

परिवहन विभाग ने 348.94 करोड़ रुपये के बजट में से 3.47 करोड़ रुपये, डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े आईटी प्रभाग ने 328.99 करोड़ रुपये में से 2.45 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग ने 170.14 करोड़ रुपये में से 9.38 करोड़ रुपये, जबकि कला एवं संस्कृति प्रभाग ने 191.53 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 6.19 करोड़ रुपये खर्च किए।

खर्च के मामले में आगे रहे ये विभाग

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वास्तविक व्यय के आधार पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, गृह विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, ऊर्जा विभाग, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, माध्यमिक शिक्षा प्रभाग, जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग और भवन निर्माण विभाग खर्च के मामले में शीर्ष दस विभागों में शामिल हैं।

सरकारी आंकड़े संकेत देते हैं कि वित्तीय स्वीकृतियों और ट्रेजरी से राशि निकलने के बावजूद अधिकांश विकास योजनाओं में व्यय की गति अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है। आने वाले महीनों में विभागों के सामने बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती रहेगा।