रामगढ़ जेल से फिरौती और हथियार तस्करी! लॉरेंस गैंग का नया चेहरा बेनकाब

रामगढ़ जेल से फिरौती और हथियार तस्करी! लॉरेंस गैंग का नया चेहरा बेनकाब

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 22, 2025, 11:08:00 AM

झारखंड के रामगढ़ जेल में बंद राजस्थान निवासी सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह का नाम अब देश के संगठित अपराध नेटवर्क में एक अहम कड़ी के रूप में उभरकर सामने आया है। जेल में रहते हुए भी उसकी सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए राजस्थान में नए सिरे से नेटवर्क खड़ा करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

गोल्डी बरार और रोहित गोदारा से गैंग के भीतर बढ़ी तनातनी के बाद लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने राजस्थान में अपना प्रभाव मजबूत करने की रणनीति अपनाई। इसके तहत पुराने अपराधियों के साथ-साथ नए बदमाशों को भी जोड़ा गया। इसी क्रम में सुनील मीणा का नाम सामने आया, जो श्रीगंगानगर जिले के घड़साना की पुरानी मंडी इलाके का रहने वाला है और पहले झारखंड व छत्तीसगढ़ में भी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है।

धमकी भरे कॉल और हथियार तस्करी की जांच
हाल के महीनों में राजस्थान के कई शहरों में बड़े कारोबारियों को गैंग के नाम पर धमकी भरे फोन कॉल मिले। पुलिस जांच में इन मामलों की कड़ियां सुनील मीणा तक पहुंचीं। एजेंसियों के मुताबिक, जेल में बंद होने के बावजूद उस पर फिरौती के लिए धमकाने और भारत–पाक सीमा के जरिए हथियारों की तस्करी में अहम भूमिका निभाने के गंभीर आरोप हैं।

दो नाम, एक अपराधी
सुनील मीणा की सबसे बड़ी चाल उसकी दोहरी पहचान रही। उसने खुद को कभी सुनील मीणा तो कभी मयंक सिंह के नाम से पेश किया। इस वजह से झारखंड और छत्तीसगढ़ पुलिस लंबे समय तक एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग अपराधियों के तौर पर तलाशती रही। जांच के दौरान यह साफ हुआ कि दोनों नाम एक ही शख्स के थे, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को वर्षों तक भ्रम में रखा।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और गैंग लिंक
जांच एजेंसियों के अनुसार, वह मलेशिया से बैठकर झारखंड के गैंगस्टर अमन साहू और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बीच समन्वयक की भूमिका निभा रहा था। अमन साहू इसी साल 11 मार्च को पलामू में एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

अजरबैजान से प्रत्यर्पण, अब कड़ी निगरानी
सुनील मीणा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी उपलब्धि मान रही हैं। उसे 28 अक्टूबर 2024 को इंटरपोल की मदद से अजरबैजान में पकड़ा गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 23 अगस्त 2025 को उसका प्रत्यर्पण कर रांची लाया गया। उस पर झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 50 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें बड़ी संख्या झारखंड और छत्तीसगढ़ से जुड़ी है।

फिलहाल एजेंसियां जेल के भीतर उसकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। साथ ही, उसके शेष नेटवर्क को तोड़ने और गैंग के प्रभाव को खत्म करने के लिए व्यापक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।