पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के गारू रेंज में कार्यरत एक ट्रैकर गार्ड की करंट लगने से मौत हो जाने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृतक की पहचान लल्लू उरांव के रूप में हुई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर वह बिजली का तार ठीक करने पेड़ पर चढ़ा था, जहां हादसा हो गया।
घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। परिवार के मुताबिक, गारू स्थित वन विभाग कार्यालय के समीप बिजली का तार टूटकर गिर गया था। आरोप है कि इसकी सूचना बिजली विभाग को देने के बजाय विभागीय कर्मियों ने लल्लू उरांव को ही तार दुरुस्त करने के लिए भेज दिया। इसी दौरान वह करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक के भाई निलेम उरांव ने कहा कि हादसे के बाद परिवार को तत्काल सूचना भी नहीं दी गई। उनका आरोप है कि विभागीय कर्मचारी शव को सीधे लातेहार सदर अस्पताल ले गए और वहां छोड़ दिया। शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलने पर परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां विभाग का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। वहां केवल एक अन्य ट्रैकर गार्ड मौजूद मिला।
परिवार का कहना है कि लल्लू उरांव घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिजनों ने राज्य सरकार और वन विभाग से मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने तथा 60 लाख रुपये मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस बीच, वन विभाग में कार्यरत ट्रैकर गार्ड अजय कुमार ने भी स्वीकार किया कि बिजली का तार गिरने के बाद लल्लू को उसे ठीक करने के लिए ऊपर भेजा गया था। उन्होंने बताया कि काम के दौरान ही वह करंट की चपेट में आ गया।
मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी जयप्रकाश शर्मा ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना शनिवार को सदर अस्पताल से मिली, जिसके बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
हादसे के बाद संबंधित वन अधिकारियों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि अधिकारी मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।