पलामू में लाइसेंसी हथियारों पर पुलिस की सख्ती, संदिग्ध धारकों की हो रही प्रोफाइलिंग

पलामू में लाइसेंसी हथियारों पर पुलिस की सख्ती, संदिग्ध धारकों की हो रही प्रोफाइलिंग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 08, 2026, 3:18:00 PM

पलामू जिले में लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग को लेकर पुलिस प्रशासन ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। हाल के दिनों में हुई हर्ष फायरिंग की घटनाओं के बाद पुलिस अब हथियार लाइसेंस धारकों की गतिविधियों और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के लिए दिए गए हथियारों का प्रदर्शन या भय पैदा करने के उद्देश्य से इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, पिछले करीब दो सप्ताह में जिले में हर्ष फायरिंग के दो मामले सामने आए थे। जांच में यह पाया गया कि दोनों घटनाओं में लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। इसके बाद पुलिस ने संबंधित मामलों में प्राथमिकी दर्ज करते हुए हथियार लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा की है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर रील और वीडियो बनाने के लिए लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर हथियारों के साथ भीड़ में घूमने और प्रदर्शन करने जैसी गतिविधियों पर भी पुलिस की नजर है। प्रशासन ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगरानी और जांच बढ़ा दी है।

पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने स्पष्ट किया कि हथियार आत्मरक्षा के लिए होते हैं, न कि शक्ति प्रदर्शन या लोगों में भय का माहौल बनाने के लिए। उन्होंने कहा कि जिन लाइसेंस धारकों का आपराधिक इतिहास रहा है, उनके संबंध में थानों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में व्यक्ति के व्यवहार, गतिविधियों और किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में संलिप्तता की जानकारी शामिल करने को कहा गया है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पुलिस ने जिले के करीब 1200 लाइसेंस धारकों की सूची तैयार की है। इसी आधार पर सभी थाना क्षेत्रों से सत्यापन रिपोर्ट मंगाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग प्रतिबंधित इलाकों में भी हथियार लेकर जाते पाए गए हैं, जिन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि प्रभावशाली लोगों के बीच हथियारों के प्रदर्शन की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी है।

पलामू लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है, जिसके कारण यहां बड़ी संख्या में हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 तक जिले में करीब 6600 हथियार लाइसेंस जारी थे। बाद में 2016-17 में व्यापक समीक्षा अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 4300 लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। उस समय स्थिति यह थी कि जिले में औसतन हर 319 लोगों पर एक हथियार लाइसेंस मौजूद था।