पलामू जिले में शराब तस्करों ने पुलिस की निगरानी से बचने के लिए नया तरीका अपनाया है। माफिया अब लड़कियों को पैसे का लालच देकर तस्करी की गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। बड़े वाहनों की जगह अब छोटी फैमिली कारों का उपयोग बढ़ा दिया गया है, ताकि किसी को शक न हो।
हाल ही में पांकी थाना क्षेत्र के एनवा–मैनवा जंगल में पुलिस ने एक अवैध शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। जांच के दौरान पुलिस को तस्करी के एक नए नेटवर्क की जानकारी मिली। जिस वाहन के जरिए तस्कर जंगल तक पहुंचते थे, वह बाहर से आम पारिवारिक कार जैसा दिखता था।
तस्करों के मोबाइल फोन से कई लड़कियों की तस्वीरें और उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी भी मिली, जिसने पुलिस को चौंका दिया।
तस्कर शराब की खेप को जिस कार में ले जाते हैं, उसमें आगे की सीट पर लड़की बैठाई जाती है। साथ में एक युवक भी होता है।
चेकिंग के दौरान दोनों खुद को कपल बताकर पुलिस को भ्रमित करते हैं, ताकि गाड़ी की तलाशी न ली जाए।
बड़ी गाड़ियों पर सख्ती बढ़ने के बाद माफियाओं ने यह नया तरीका अपनाया है।
एसपी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
लड़कियों को सामने बैठाकर तस्करी किया जाना
बड़ी गाड़ियों से हटकर छोटी कारों का उपयोग
वाहनों के अंदरूनी संरचना में बदलाव कर छुपाकर ले जाना
उन्होंने कहा कि पुलिस सतर्क है और नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे समेत सभी रूटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अवैध शराब के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
पलामू बिहार सीमावर्ती जिला है, इसलिए यहां शराब तस्करी की घटनाएँ अधिक होती हैं।
बिहार चुनाव से पहले यहां 33 करोड़ रुपये के अवैध नशीले पदार्थ पकड़े गए थे।
विधानसभा व लोकसभा चुनाव अवधि में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध शराब और ड्रग्स जब्त की गई।
जून में सतबरवा से एक ट्रक शराब पकड़ी गई थी।
हरिहरगंज, छतरपुर पड़वा, लेस्लीगंज और पांकी क्षेत्र में भी कई बड़े वाहन पकड़े गए।
बीते वर्षों में पुलिस की कार्रवाई का केंद्र बड़ी गाड़ियाँ थीं, जिससे माफियाओं को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसी वजह से तस्करी के पैटर्न में लगातार बदलाव किया जा रहा है।
बड़े वाहनों की बजाय छोटे कारों का उपयोग
वाहनों के मॉडल में फेरबदल
गाड़ियों के भीतर छुपे चैंबर बनाकर शराब की ढुलाई