लोहरदगा जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। जरूरत के समय मरीजों तक एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच रही, जिससे गंभीर रूप से बीमार लोगों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में लंबे इंतजार के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे इलाज में देरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिले में फिलहाल 108 सेवा के अंतर्गत पांच एंबुलेंस संचालित हैं। इसके अलावा लोहरदगा सदर अस्पताल के पास तीन अन्य एंबुलेंस भी उपलब्ध हैं। यानी कुल आठ एंबुलेंस होने के बावजूद आम लोगों का कहना है कि आपात स्थिति में उन्हें समय पर इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आपातकालीन सहायता के लिए 108 कंट्रोल रूम पर कई बार संपर्क करने के बावजूद अक्सर फोन नहीं उठाया जाता। यदि कॉल लग भी जाए तो कभी सभी एंबुलेंस व्यस्त होने की जानकारी दी जाती है, तो कभी तकनीकी खराबी का हवाला देकर सेवा देने में असमर्थता जताई जाती है। ऐसे में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब किसी मरीज को बेहतर उपचार के लिए रांची रेफर किया जाता है। लगभग 75 किलोमीटर की दूरी तय करने में कई एंबुलेंस ढाई से तीन घंटे तक का समय ले रही हैं। बताया जाता है कि पुराने और तकनीकी रूप से खराब वाहनों के कारण सफर की गति प्रभावित होती है, जिससे गंभीर मरीजों की हालत और बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, प्रसव जैसी आपात परिस्थितियों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है। लेकिन लोहरदगा में मौजूदा व्यवस्था लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है।
स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि लोहरदगा सदर अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों का समुचित इलाज उपलब्ध नहीं है। अधिकांश गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद उच्च चिकित्सा संस्थानों, विशेषकर रांची, रेफर करना पड़ता है। ऐसे समय यदि एंबुलेंस समय पर न मिले तो मरीजों और उनके परिवारों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंस सेवा में सुधार के लिए केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने, एंबुलेंस की नियमित मरम्मत और तकनीकी रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ सेवा की सतत निगरानी भी आवश्यक है। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में प्रत्येक मरीज को बिना देरी के एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध हो सके और इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी से किसी की जान जोखिम में न पड़े।