झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब जेजेएमपी (झारखंड जन मुक्ति परिषद) के एक शीर्ष सक्रिय सदस्य ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। राज्य सरकार की ‘नई दिशा’ पहल और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर संगठन के सबजोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा उर्फ विनोद लोहरा ने गुरुवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।
लातेहार पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र लोहरा ने विधिवत आत्मसमर्पण किया। इस मौके पर पलामू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, लातेहार के एसपी कुमार गौरव और सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के कमांडेंट राम बुनकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए माला पहनाई और पुष्पगुच्छ भेंट किया। उसने मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की। अधिकारियों ने भी उसे प्रोत्साहित करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उसे सभी निर्धारित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
इस अवसर पर एसपी कुमार गौरव ने बताया कि राज्य सरकार की पहल का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि ‘नई दिशा’ अभियान उग्रवाद से जुड़े लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में लौटने के लिए प्रेरित कर रहा है। सुरेंद्र लोहरा लंबे समय से कई उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा था और पुलिस उसे तलाश रही थी।
पुलिस के अनुसार, यह आत्मसमर्पण न केवल एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी है। एसपी ने अन्य उग्रवाद से जुड़े युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता त्याग कर सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाएं और समाज के विकास में भागीदार बनें।