मनिका प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्र की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

मनिका प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्र की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 09, 2026, 4:08:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार जिले के मनिका प्रखंड के कुछ गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना से जुड़े मामले में राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से फिर से समय मांगने पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जो दूरस्थ और विकास से वंचित हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे इलाकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

दरअसल, इससे पहले सितंबर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन करीब तीन महीने बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिस पर अदालत ने असंतोष जताया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने अदालत को बताया कि मनिका प्रखंड के ओपे, दुंबी समेत चार गांवों में बच्चों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन वहां अब तक आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित नहीं किया गया है। उनका कहना था कि छोटे बच्चों के पोषण, शिक्षा और समग्र विकास के लिए इन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र की सख्त जरूरत है।

अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि सरकार को इन गांवों में जल्द से जल्द आंगनबाड़ी केंद्र खोलने का निर्देश दिया जाए। यह जनहित याचिका शीला देवी और अन्य लोगों की ओर से दायर की गई है, जिसमें ग्रामीण बच्चों के हित में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है।