मनिका प्रखंड के जिला परिषद सदस्य बलवंत सिंह ने परिषद भवन में प्रेस वार्ता कर जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) गौतम कुमार साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रमोशन, ट्रांसफर, पोस्टिंग, वेतन संधारण और नवनियुक्त सहायक आचार्यों की नियुक्ति के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। बलवंत सिंह के अनुसार, गोपनीय शाखा में कार्यरत दो शिक्षक—राजीव कुमार और संतोष पांडेय—इस पूरे खेल को संचालित कर रहे हैं और शिक्षकों से नियमित रूप से पैसे वसूलने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि जो शिक्षक पैसे देने से इनकार करते हैं, उनकी शिकायत एरिया ऑफिसर ऋषिकेश कुमार के पास भेज दी जाती है और मनमाने तरीके से स्कूल की जांच कर उनका वेतन रोक दिया जाता है।
उदाहरण देते हुए बलवंत सिंह ने कहा कि मध्य विद्यालय सिंजो के शिक्षक मनोज कुमार का तीन महीने से वेतन रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने अवैध भुगतान देने से इनकार किया था। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि 72 प्राथमिक शिक्षकों को अपर प्राइमरी में प्रमोशन मिलने के बाद प्रत्येक से लगभग 80 हजार रुपये वसूले गए। उनके अनुसार, पिछले कुछ महीनों में डीएसई कार्यालय के माध्यम से लगभग 3 करोड़ रुपये की अवैध उगाही हुई है। इसके साथ ही उन्होंने डीईओ प्रिंस कुमार पर भी अनियमितताओं का आरोप लगाया।
बलवंत सिंह ने सिमडेगा की रहने वाली अनास्तासिया खेस का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति 19 दिसंबर 2022 को ख्रीस्त राजा मध्य विद्यालय चंदवा में हुई थी और 4 जनवरी 2023 को उन्हें योगदान देना था, लेकिन डीईओ ने उनका नाम हटाकर अपनी बहन की बहाली कर दी। राज्य स्तर से इस मामले में कार्रवाई की अनुशंसा हुई, फिर भी संबंधित अधिकारी पद पर बने हुए हैं। बलवंत सिंह ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर धरना देने को मजबूर होंगे।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम कुमार साहू ने बलवंत सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि आरोपों के पीछे कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और विभागीय कार्यवाही पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार की जाती है। डीएसई ने स्पष्ट किया कि शिक्षक मनोज कुमार का वेतन किसी अवैध वसूली या अनुचित कारण से रोका नहीं गया, बल्कि संबंधित मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के स्थानांतरण, प्रमोशन और नियुक्ति से जुड़े सभी निर्णय निर्धारित नियमावली और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार लिए जाते हैं।