खूंटी जिले में आदिवासी आंदोलनकारी और पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में 17 जनवरी 2026 को पूरे झारखंड में बंद बुलाया गया है। यह आह्वान भूमि लूट, खनन माफिया और आदिवासी समाज पर हो रहे कथित सुनियोजित हमलों के खिलाफ किया गया है। आदिवासी समन्वय समिति (खूंटी) समेत कई दर्जन आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से बंद की घोषणा की है।
गौरतलब है कि 7 जनवरी 2026 को खूंटी जिले के अड़की थाना क्षेत्र में जमुआदाहा के पास अज्ञात अपराधियों ने सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वे अपनी पत्नी के साथ बाइक से घर लौट रहे थे, तभी हमलावरों ने उन पर अचानक फायरिंग कर दी। इस घटना से पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।
आदिवासी नेतृत्व पर हमला बताया गया मामला
आदिवासी संगठनों का कहना है कि सोमा मुंडा कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे। वे 56 गांवों की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था के प्रमुख थे और एदल सांगा पड़हा के उत्तराधिकारी माने जाते थे। संगठन दावा कर रहे हैं कि उन्होंने जीवनभर जल, जंगल और जमीन की रक्षा, संविधान प्रदत्त अधिकारों और आदिवासी अस्मिता के लिए संघर्ष किया। उनके मुताबिक यह हत्या किसी निजी रंजिश का परिणाम नहीं, बल्कि उन शक्तियों की साजिश है जो भूमि माफिया, खनन दलालों और कॉरपोरेट हितों के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाना चाहती हैं।
आदिवासी संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड राज्य बने 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद आदिवासी समाज की स्थिति में ठोस सुधार नहीं हुआ है। पेसा कानून, सीएनटी-एसपीटी एक्ट और अन्य सुरक्षात्मक प्रावधानों के कमजोर क्रियान्वयन के कारण जमीन से जुड़े घोटाले, जबरन कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भूमि हड़पने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
संगठनों ने खूंटी, रांची, गुमला और सिमडेगा जैसे जिलों में आदिवासी कार्यकर्ताओं और सामाजिक नेताओं की हत्याओं का हवाला देते हुए इसे एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति बताया है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि 17 जनवरी का झारखंड बंद सोमा मुंडा को न्याय दिलाने और आदिवासी अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध का प्रतीक होगा। उन्होंने सरकार से इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।