पुलिस हिरासत में नाबालिग की पिटाई मामले में NHRC का सख्त आदेश, मुआवजा और दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग

पुलिस हिरासत में नाबालिग की पिटाई मामले में NHRC का सख्त आदेश, मुआवजा और दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 01, 2026, 11:06:00 AM

झारखंड के खूंटी जिले में एक नाबालिग के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ित बच्चे, शिवा कुमार सिंह, को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

यह मामला तब सामने आया जब चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के सचिव बैद्यनाथ कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पाया कि पुलिस की कार्रवाई न केवल गैरकानूनी थी, बल्कि एक नाबालिग के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है।

घटना 16 फरवरी 2025 की बताई जा रही है। उस दिन पुलिस एक मानव तस्करी के संदिग्ध की तलाश में कोसंबी गांव पहुंची थी। आरोप है कि जब संदिग्ध अपने घर पर नहीं मिला, तो पुलिस ने घर में तोड़फोड़ की और उसके 16 वर्षीय बेटे को जबरन अपने साथ ले गई। बच्चे को खूंटी महिला थाने में रखा गया, जहां उसके साथ कथित रूप से बुरी तरह मारपीट की गई।

आरोपों के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर संतोष रजक ने बच्चे को इतना प्रताड़ित किया कि वह सामान्य रूप से चलने-फिरने तक में असमर्थ हो गया। बताया जा रहा है कि पुलिस इस दबाव के जरिए उसके पिता का ठिकाना जानना चाहती थी, जबकि स्वयं बच्चा मामले में किसी भी तरह से आरोपी नहीं था।

NHRC ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि किसी नाबालिग को इस तरह थाने ले जाकर शारीरिक प्रताड़ना देना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है। आयोग ने इसे जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करार दिया।

राज्य सरकार ने आयोग को सूचित किया है कि मुआवजे की राशि स्वीकृत कर दी गई है और जल्द ही इसे पीड़ित परिवार तक पहुंचा दिया जाएगा। हालांकि, आयोग ने इस बात पर असंतोष जताया है कि अब तक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है और इस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता बताई है।