हजारीबाग में जंगली हाथियों का कहर जारी, वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

हजारीबाग में जंगली हाथियों का कहर जारी, वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 09, 2026, 2:54:00 PM

हजारीबाग जिले में जंगली हाथियों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार तड़के कटकमदाग थाना क्षेत्र की नवादा पंचायत अंतर्गत बनहा गांव में एक हाथी के हमले में ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान गणेश गोप के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, वह अहले सुबह शौच के लिए घर से बाहर निकले थे, तभी अचानक सामने आए हाथी ने उन पर हमला कर दिया और कुचल दिया।

यह घटना क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन हाथी के हमले से मौत का मामला है। इससे पहले शुक्रवार देर रात हजारीबाग के चुटयारों इलाके में हाथी ने एक दंपति पर हमला कर दिया था। उस घटना में पति की घटनास्थल पर ही जान चली गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल महिला को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है। बनहा गांव में घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के रेंजर, स्थानीय मुखिया, अन्य जनप्रतिनिधि और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मृतक के परिजनों को सांत्वना देने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग पर फूट पड़ा।

मौके पर मौजूद विधायक प्रदीप प्रसाद ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में हाथियों की नियमित आवाजाही होती है, वहां न तो समय पर माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है और न ही प्रभावी निगरानी की व्यवस्था की गई है। विधायक का आरोप था कि वन विभाग न केवल सुरक्षा इंतजामों में विफल रहा है, बल्कि ग्रामीणों को जागरूक करने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि आगे भी इस तरह की घटनाएं होती रहीं, तो वे जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तर तक शव ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, प्रशासनिक लापरवाही के चलते आम लोगों की जान जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

वहीं, वन विभाग के रेंजर घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत करने और स्थिति संभालने में जुटे दिखे, लेकिन मीडिया के सवालों से दूरी बनाए रखी। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक हाथियों की निगरानी, नियमित माइकिंग और ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक ऐसे जानलेवा हादसों पर लगाम लगना मुश्किल है।

लगातार हो रही मौतों ने एक बार फिर प्रशासन और वन विभाग की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि इन घटनाओं के बाद जिम्मेदार विभाग ठोस कदम उठाते हैं या ग्रामीणों को यूं ही खतरे के साए में जीना पड़ेगा।