जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन सजायाफ्ता फरार, दो हेड वार्डन निलंबित

जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन सजायाफ्ता फरार, दो हेड वार्डन निलंबित

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 02, 2026, 1:57:00 PM

झारखंड की सबसे सुरक्षित जेलों में गिनी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी कारा) की सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब यहां से तीन सजायाफ्ता कैदी फरार हो गए। घटना को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक फरार बंदियों का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है। पुलिस और जेल प्रशासन की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, हालांकि सफलता अब तक दूर है।

जेल प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की जांच में सामने आया है कि कैदियों ने बैरक संख्या-6 की खिड़की संख्या-4 का ग्रिल काटकर भागने की योजना को अंजाम दिया। यह वारदात देर रात करीब 1:36 बजे से 2:45 बजे के बीच हुई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि फरारी कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि इसके पीछे पहले से की गई गहरी साजिश थी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन ने लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। तीनों फरार कैदियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 224 के तहत केस दर्ज किया गया है। यह प्राथमिकी संख्या 196/2025 के रूप में दर्ज है। साथ ही प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं और एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। फोरेंसिक टीम कैदियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की भी गहन पड़ताल कर रही है।

हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक के आदेश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई गई है। कुल पांच अलग-अलग टीमें फरार बंदियों की तलाश में जुटी हुई हैं। हजारीबाग के साथ-साथ धनबाद, रांची और बिहार के संभावित ठिकानों पर भी लगातार छापेमारी की जा रही है।

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि फरारी के वक्त घना अंधेरा, धुंध और रात में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति का कैदियों ने भरपूर लाभ उठाया। नाम न छापने की शर्त पर एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि ऐसे हालात में निगरानी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। घटना के अगले दिन जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार ने जेल पहुंचकर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की।

लापरवाही पर कार्रवाई, दो हेड वार्डन निलंबित

प्रारंभिक जांच के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गुरुवार देर शाम दो स्थायी हेड वार्डन को निलंबित कर दिया। निलंबित कर्मियों में हरेंद्र महतो और उमेश सिंह शामिल हैं। दोनों की तैनाती उसी सेक्टर संख्या-6 के वार्ड नंबर-4 में थी, जहां से तीनों सजायाफ्ता कैदी रॉड काटकर फरार होने में सफल रहे।

प्रशासन का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।