हजारीबाग में ‘नवजात चोरी’ का सच आया सामने, माता-पिता की सहमति से सौंपा गया था बच्चा

हजारीबाग में ‘नवजात चोरी’ का सच आया सामने, माता-पिता की सहमति से सौंपा गया था बच्चा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 27, 2026, 10:53:00 AM

बहिमर गांव में नवजात शिशु के कथित अपहरण से मचा हड़कंप आखिरकार एक चौंकाने वाले सच के साथ थम गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस घटना को बच्चे की चोरी बताया जा रहा था, वह दरअसल माता-पिता की सहमति से किया गया एक सुनियोजित नाटक था। गरीबी, पारिवारिक दबाव और सामाजिक बदनामी के डर ने पूरे मामले को झूठे अपहरण का रूप दे दिया।

जानकारी के मुताबिक, छठे बच्चे को जन्म देने वाली बेबी देवी पहले से ही पांच बच्चों की परवरिश और गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। परिवार की सीमित आमदनी और बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण वह नवजात की देखभाल करने की स्थिति में नहीं थी। इसी बीच उसने अपनी एक सहेली के जरिए अपने ही रिश्तेदार को बच्चे को स्वेच्छा से सौंप दिया।

बदनामी के डर से गढ़ी गई कहानी

बच्चे के गांव से बाहर जाने की भनक जैसे ही आसपास फैली, परिवार को समाज में बदनामी का भय सताने लगा। इसी डर को छिपाने के लिए परिजनों ने नवजात चोरी की कहानी गढ़ दी। देखते ही देखते यह बात फैल गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बच्चे का अपहरण कर लिया है।

इस अफवाह ने गांव में आक्रोश भड़का दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।

SIT जांच में खुला राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी, तो पूरी कहानी परत-दर-परत खुलने लगी। इसी दौरान पुलिस ने चौपारण इलाके से एक महिला को हिरासत में लिया, जिसके पास से नवजात शिशु सुरक्षित अवस्था में बरामद किया गया।

पुलिस ने बच्चे को उसकी मां को सौंप दिया है। हालांकि, जानबूझकर झूठी सूचना फैलाने, प्रशासन को गुमराह करने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में मामले से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।