हुरहुरू खास महल जमीन विवाद में योगेंद्र को राहत, HC ने तोड़फोड़ पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

शहर के हुरहुरू स्थित खास महल जमीन विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

हजारीबाग : शहर के हुरहुरू स्थित खास महल जमीन विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने  अंतरिम राहत देते हुए संबंधित जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने पांच अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को अगले आदेश तक तोड़फोड़ की कार्रवाई स्थगित रखने का निर्देश दिया। मामला मुजीबुर रहमान की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में हुरहुरू स्थित प्लॉट संख्या 872/1235, 873/1336 और 893/1337, होल्डिंग नंबर 302 और थाना नंबर 157 की जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत में पक्ष रखा

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जमीन पर दोबारा कब्जा दिलाने के संबंध में हजारीबाग उपायुक्त की अनुशंसा की जानकारी उन्हें अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह भी बताया गया कि जमीन पर बनी चहारदीवारी का एक हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है और शेष निर्माण को भी ध्वस्त किए जाने की आशंका है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने संबंधित निर्माण को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। मामले को चार सप्ताह बाद दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।

सितंबर में अतिक्रमण हटाने पहुंचा था प्रशासन

हुरहुरू के कैंटोनमेंट मौजा में खास महल जमीन को लेकर विवाद 18 सितंबर 2026 को सामने आया था। उस दिन सदर अंचलाधिकारी सह खास महल पदाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम पुलिस बल और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची थी। प्रशासन की ओर से संबंधित जमीन को सरकारी खास महल भूमि बताते हुए वहां बने पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को हटाने की कार्रवाई की गई थी।

संबंधित जमीन सरकारी खास महल भूमि है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है - प्रशासन

इसी दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित आदेश की प्रति को लेकर अधिकारियों से सवाल किए थे। मौके पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। प्रशासन का पक्ष रहा है कि संबंधित जमीन सरकारी खास महल भूमि है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। वहीं, योगेंद्र साव ने जमीन के पुराने राजस्व अभिलेख, पट्टे के नवीनीकरण और पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दस्तावेजों की जांच की मांग की थी।

पुराने राजस्व रिकॉर्ड को लेकर भी विवाद

मामले में जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और पट्टे से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं। योगेंद्र साव की ओर से दावा किया गया था कि संबंधित जमीन के रजिस्टर-2 में अब भी मोहम्मद एहसान का नाम दर्ज है। उन्होंने पुराने अभिलेखों और पट्टे से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की थी। वहीं, जमीन के वास्तविक स्वामित्व और कब्जे के अधिकार का अंतिम निर्धारण संबंधित राजस्व अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही होगा। जिले में खास महल जमीन के सर्वेक्षण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों की समीक्षा भी की गई है। उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समेकित रिपोर्ट तैयार करने तथा पुनर्ग्रहित खास महल जमीन पर अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।

4 सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद संबंधित जमीन पर निर्माण ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई फिलहाल रुकी रहेगी। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करना है। इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी। हालांकि, हाईकोर्ट का यह आदेश जमीन के स्वामित्व या कब्जे के अधिकार पर अंतिम फैसला नहीं है। जमीन के स्वामित्व, पट्टे की वैधता, पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई के औचित्य पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

हजारीबाग से सुनील कुमार ठाकुर की रिपोर्ट