हजारीबाग जिले के केरेडारी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है। यहां स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दवाओं के प्रबंधन को लेकर स्थानीय लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरोप हैं कि अस्पताल में सरकारी दवाओं का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक स्टोर में रखकर खराब होने दिया जाता है।
मंगलवार की सुबह इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब अस्पताल परिसर के पीछे स्थित कचरा स्थल से तेज आवाज सुनकर ग्रामीण वहां पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मौके पर बड़ी मात्रा में दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और अन्य चिकित्सीय सामग्री जलती हुई मिली। लोगों का दावा है कि इनमें कई दवाएं अभी उपयोग योग्य थीं और उनकी कीमत लाखों रुपये के आसपास हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर संबंधित अधिकारियों (सिविल सर्जन और जिला प्रशासन) को भेजा गया है, ताकि जांच कराई जा सके।
स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में मरीजों को सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा जाता है। उनका कहना है कि यह स्थिति खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय है, जिन्हें आवश्यक दवाओं के लिए निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा के नरेश महतो और आजसू पार्टी के कंचन यादव ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संबंधित स्टोर कीपर को हटाने की भी बात कही है।
हालांकि, इन आरोपों को सीएचसी प्रभारी डॉ. नफीस अंजुम ने सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि अस्पताल में दवाओं का वितरण नियमित रूप से किया जाता है और किसी भी प्रकार की बर्बादी नहीं होती। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।