हजारीबाग कोषागार से वेतन मद की लगभग 15 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी से जुड़े मामले में सीआईडी की विशेष अदालत ने तीन आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने खुशबू सिंह, काजल कुमारी और धीरेंद्र सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए उन्हें फिलहाल रिहा करने से मना कर दिया।
इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में आदेश सुनाते हुए विशेष अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया।
यह मामला मूल रूप से हजारीबाग के लोहसिंघना थाना कांड संख्या 32/2026 के तहत दर्ज किया गया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंप दी गई। इसके बाद सीआईडी ने 24 अप्रैल 2026 को सीआईडी थाना कांड संख्या 05/2026 दर्ज कर स्वतंत्र जांच शुरू की।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित वित्तीय अनियमितता में कई लोगों की भूमिका सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में एसपी कार्यालय, हजारीबाग के मुख्य लेखापाल एवं कथित मास्टरमाइंड शंभू कुमार, उनकी पत्नी काजल कुमारी, सहयोगी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, उनकी पत्नी खुशबू सिंह तथा बिहार के गया जिले के कांच थाना क्षेत्र निवासी धीरेंद्र सिंह शामिल हैं।
सीआईडी का आरोप है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से वेतन मद से करीब 15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को अंजाम दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। फिलहाल सीआईडी पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।