हजारीबाग नगर निगम की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, यूनियन ने की पारदर्शिता और कानूनी जांच की मांग

हजारीबाग नगर निगम की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, यूनियन ने की पारदर्शिता और कानूनी जांच की मांग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 07, 2026, 12:18:00 PM

हजारीबाग नगर निगम में सफाई कर्मियों और चालकों की नियुक्तियों को लेकर नया विवाद सामने आया है। अधिवक्ता और अखिल भारतीय मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विवेक कुमार वाल्मीकि ने नगर आयुक्त को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, श्रमिक अधिकारों की अनदेखी और संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि नगर निगम बोर्ड द्वारा सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से उचित माना जा सकता है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष भूमिका गंभीर कानूनी सवाल खड़े करती है। यूनियन का आरोप है कि नीति निर्माण की सीमा से आगे बढ़कर भर्ती में हस्तक्षेप किया गया, जो वैधानिक अधिकारों के दायरे से बाहर है।

वाल्मीकि ने दावा किया कि कई नियुक्तियां बिना किसी सार्वजनिक सूचना या विज्ञापन के केवल फाइल प्रक्रिया के आधार पर की गईं। उनके अनुसार यह प्रक्रिया संविधान में समान अवसर और निष्पक्ष चयन से जुड़े प्रावधानों के विपरीत है। ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित उमा देवी फैसले का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि पारदर्शी प्रक्रिया के बिना की गई भर्तियां न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सकतीं।

यूनियन ने झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों के संसाधनों का उपयोग जनता और स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। आरोप लगाया गया कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को अवसर दिए बिना अपारदर्शी तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे अधिनियम की मूल भावना प्रभावित हो रही है।

मामले में आउटसोर्सिंग एजेंसी गुरु रामदास कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। ज्ञापन के अनुसार कंपनी के माध्यम से कार्य कर रहे कई श्रमिकों को अब तक नियुक्ति पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। साथ ही कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां और भविष्य निधि जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। यूनियन ने इसे कॉन्ट्रैक्ट लेबर कानून और श्रमिकों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

इसके अलावा नगर निगम और आउटसोर्सिंग एजेंसी के बीच हुए समझौते को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। यूनियन का कहना है कि सरकारी संस्थाओं में अनुबंध संबंधी जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए आवश्यक है।

ज्ञापन में कई मांगें रखी गई हैं। इनमें सभी रिक्तियों के लिए नियोजन कार्यालय के माध्यम से सार्वजनिक विज्ञापन जारी करना, सात दिनों के भीतर आउटसोर्सिंग कंपनी से संबंधित अनुबंध की प्रति उपलब्ध कराना, सभी कर्मचारियों के ईपीएफ खाते सुनिश्चित करना तथा श्रमिकों को सुरक्षा किट और डिजिटल पहचान पत्र देना शामिल है।

इस मामले की प्रतिलिपि नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, नगरीय प्रशासन निदेशक, हजारीबाग उपायुक्त, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त और श्रम आयुक्त को भी भेजी गई है, जिससे मामले की व्यापक प्रशासनिक जांच की मांग को बल मिला है।