पहले धनबाद जेल से भागा देवा भुईयां, फिर हजारीबाग से फरार; ‘लाल टोपी’ नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों की तलाश जारी

पहले धनबाद जेल से भागा देवा भुईयां, फिर हजारीबाग से फरार; ‘लाल टोपी’ नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों की तलाश जारी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 03, 2026, 10:42:00 AM

हजारीबाग सेंट्रल जेल से 30 दिसंबर की रात हुए सनसनीखेज फरारी मामले में जांच के दौरान गंभीर चूक और संभावित साजिश के संकेत सामने आए हैं। फरार तीन कैदियों में शामिल देवा भुईयां इससे पहले भी धनबाद जेल से भाग चुका था, बावजूद इसके उसे विशेष निगरानी श्रेणी से हटाकर सामान्य वार्ड में रखा गया था। अब जांच दल उस कर्मचारी या अधिकारियों की पहचान में जुटा है, जिनके निर्देश पर यह सुरक्षा नियम तोड़ा गया।

पहले भी कर चुका है जेल से फरारी
जेल प्रशासन के अनुसार, देवा भुईयां वर्ष 2020 में धनबाद जेल से फरार हो चुका था। बाद में उसे पकड़कर दोबारा वहीं रखा गया। मार्च 2025 में देवा भुईयां, जीतेंद्र रवानी और राहुल रजवार—तीनों को धनबाद जेल से स्थानांतरित कर हजारीबाग सेंट्रल जेल लाया गया था। तीनों को POCSO एक्ट के तहत सजा मिल चुकी है।

लाल टोपी और सेल का नियम, फिर भी लापरवाही
जेल मैनुअल के मुताबिक, जो कैदी पहले जेल से भाग चुके हों, उनकी पहचान और निगरानी के लिए सिर पर लाल टोपी पहनाना अनिवार्य है और उन्हें अलग सेल में रखा जाता है। हजारीबाग सेंट्रल जेल में शुरुआत में इस नियम का पालन करते हुए देवा भुईयां को लाल टोपी पहनाकर सेल में रखा गया था। लेकिन कुछ समय बाद उसकी लाल टोपी हटा दी गई और उसे सेल से निकालकर सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

तीनों कैदी एक ही वार्ड में रखे गए
जांच में सामने आया है कि कथित रूप से सुनियोजित तरीके से देवा भुईयां को जीतेंद्र रवानी और राहुल रजवार के साथ सेक्टर-6 के वार्ड नंबर चार में रखा गया। यही वह वार्ड है, जहां से तीनों कैदी फरार हुए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि देवा भुईयां से लाल टोपी हटाने और उसे सामान्य वार्ड में रखने का आदेश किसने दिया था।

फिल्मी अंदाज़ में दीवार फांदकर भागे कैदी
मुख्यालय को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, फरारी की रात पहले वार्ड की खिड़की की लोहे की छड़ों को काटा गया। इसके बाद तीनों कैदी वार्ड से बाहर निकले और जेल की आंतरिक दीवार पार की। बाहरी दीवार के पास पहुंचने पर बाहर से किसी ने रस्सी अंदर फेंकी, जिसके सहारे तीनों ने जेल की ऊंची दीवार लांघ ली और फरार हो गए।

कर्मचारियों और बाहरी मदद की जांच जारी
खिड़की की छड़ काटने से लेकर रस्सी उपलब्ध कराने तक में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी जांच की जा रही है। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन जेलकर्मी या बाहरी लोग शामिल थे। हालांकि, जेल प्रशासन ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए उस इलाके में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश अब भी जारी है।