झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं गिरिडीह जिले के डुमरी के पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मो. शहजाद परवेज को विभागीय जांच में बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने उनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त करते हुए सभी आरोपों से उन्हें दोषमुक्त घोषित कर दिया है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
मो. शहजाद परवेज पर आरोप लगाए गए थे कि डुमरी में पदस्थापना के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) बाईपास परियोजना के लिए अधिग्रहित इसरी बाजार मौजा की जमीन पर हो रहे कथित अवैध कब्जे और निर्माण को रोकने के लिए उन्होंने अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं की। यह भी कहा गया था कि उनकी निष्क्रियता के कारण सरकारी अधिग्रहित भूमि के अनधिकृत हस्तांतरण और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया जारी रही, जिससे अतिक्रमण की समस्या बढ़ती गई।
विभागीय आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने मौखिक निर्देशों का हवाला देकर भूमि से जुड़े हितधारकों पर दबाव बनाने और भयादोहन का प्रयास किया। इन आरोपों को सरकारी सेवक आचरण नियमावली के तहत गंभीर कदाचार और कर्तव्य के प्रति अपेक्षित निष्ठा के उल्लंघन के रूप में देखा गया था।
जांच के दौरान मो. शहजाद परवेज ने सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने अपने पक्ष में कहा कि विवादित जमीन का क्रय-विक्रय उनके कार्यभार संभालने से पहले ही हो चुका था। उनके अनुसार, अतिक्रमण रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को लगातार निर्देश दिए गए थे, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से आवश्यक और पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी बताया कि विधानसभा चुनाव संबंधी व्यस्तताओं के बावजूद निर्माण कार्य रुकवाने के लिए उन्होंने मौखिक स्तर पर आवश्यक प्रयास किए थे।
मामले की जांच के दौरान गिरिडीह के उपायुक्त की रिपोर्ट सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि अधिकारी के कार्यकाल में अतिक्रमण रोकने के लिए कदम उठाए गए थे और भयादोहन के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के परीक्षण के बाद राज्य सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं।
इसी आधार पर सरकार ने विभागीय कार्यवाही का समापन करते हुए मो. शहजाद परवेज को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेश के साथ यह मामला आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है।