गढ़वा में ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा, आरसेटी परिसर में खुलेगा 'पलाश मार्ट'

गढ़वा में ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा, आरसेटी परिसर में खुलेगा 'पलाश मार्ट'

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 17, 2026, 11:08:00 AM

झारखंड के गढ़वा जिले में ग्रामीण युवाओं और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल की है। उपायुक्त अनन्य मित्तल ने सदर प्रखंड के चिरौंजिया स्थित एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) का निरीक्षण कर संस्थान की गतिविधियों और प्रशिक्षण व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लोगों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरसेटी परिसर में ‘पलाश मार्ट’ स्थापित करने की घोषणा की।

उपायुक्त ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सामानों को यदि उचित बाजार और मंच मिले तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। प्रस्तावित पलाश मार्ट के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने परिसर को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरेडा के माध्यम से सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। इसके लिए संबंधित एजेंसी को पत्र भेजने की बात भी कही गई। उन्होंने वर्कशॉप, प्रयोगशाला, रसोईघर, छात्रावास और कैंटीन का निरीक्षण किया तथा साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था को संतोषजनक बताया। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशिक्षण सुविधाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप और विकसित किया जाए।

उपायुक्त ने कहा कि आरसेटी का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं को संस्थान से जोड़ने तथा विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे प्रशिक्षणार्थियों तक पहुंचाने पर बल दिया। इस दिशा में निजी क्षेत्र और अन्य संस्थाओं के सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

निरीक्षण के दौरान बकरी पालन का प्रशिक्षण ले रहे युवाओं ने पशुपालन योजनाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या प्रशासन के सामने रखी। प्रशिक्षणार्थियों ने बताया कि सरकारी अनुदान की राशि सीधे वेंडरों को भेज दी जाती है, जिसके बाद कई बार गुणवत्तापूर्ण पशु उपलब्ध नहीं कराए जाते। इससे लाभुकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। युवाओं ने मांग की कि लाभार्थियों को स्वयं बाजार से पशु खरीदने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने मामले की विभागीय जांच कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि योजनाओं में पारदर्शिता और लाभुकों के हितों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है।

उपायुक्त ने आरसेटी निदेशक डॉ. संजय कुमार को निर्देश दिया कि पशुपालन आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि इससे युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ सरकारी ऋण, सब्सिडी और योजनाओं की सही जानकारी भी मिल सकेगी।

निरीक्षण के दौरान अग्रणी बैंक प्रबंधक सत्यदेव रंजन सहित संस्थान के कई प्रशिक्षक और अधिकारी मौजूद रहे।