WW-II का खतरनाक अवशेष! बहरागोड़ा में ड्रोन सर्वे में मिला एक और विस्फोटक, सेना ने घेरा इलाका

WW-II का खतरनाक अवशेष! बहरागोड़ा में ड्रोन सर्वे में मिला एक और विस्फोटक, सेना ने घेरा इलाका

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 24, 2026, 1:23:00 PM

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी का तट इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 17 मार्च को यहां 500 पाउंड का एक अमेरिकी बम मिलने के बाद अब सेना के ड्रोन सर्वेक्षण में एक और संदिग्ध विस्फोटक की पहचान हुई है। इस नई जानकारी ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चिंता को और गहरा कर दिया है।

भारतीय सेना की बम निरोधक दस्ता (BDS) टीम ने पनिपाड़ा-नागुडसाई मार्ग के आसपास अत्याधुनिक उपकरणों और ड्रोन तकनीक की मदद से पूरे इलाके का सूक्ष्म निरीक्षण किया। इस प्रक्रिया के दौरान एक अतिरिक्त बम जैसे वस्तु के संकेत मिले हैं, जिसे फिलहाल निष्क्रिय अवस्था में माना जा रहा है। हालांकि, इसकी मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को संभावित खतरे के दायरे में ला दिया है।

अब तक बरामद विस्फोटक ‘AN-M64 500 पाउंड’ श्रेणी का बताया जा रहा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय उपयोग में लाया जाता था। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय बाद भी ऐसे बमों में मौजूद विस्फोटक सामग्री अत्यधिक खतरनाक बनी रह सकती है और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ गंभीर परिणाम ला सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना ने घटनास्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र को ‘नो-गो जोन’ घोषित कर दिया है। पुलिस बल ने इलाके को पूरी तरह घेरकर आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। शुरुआती बम मिलने के बाद कुछ दिनों तक सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन अब सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

इन बमों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और जोखिम भरी मानी जा रही है। सेना के अधिकारी उच्च मुख्यालय से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से हटाया या निष्क्रिय किया जा सके। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वर्षों पुराने इन हथियारों में रासायनिक प्रतिक्रियाएं अनियंत्रित हो सकती हैं, जिससे थोड़ी सी चूक भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।

स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जमीन के भीतर ऐसे कई और बम दबे हो सकते हैं। यदि यह आशंका सही साबित होती है, तो यह पूरा इलाका ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) का संवेदनशील क्षेत्र बन सकता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह इलाका सामरिक गतिविधियों का हिस्सा रहा था, जिससे यहां पुराने हथियारों के मिलने की संभावना को बल मिलता है।

फिलहाल प्रशासन और सेना की टीमें सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में विस्तृत जांच और निष्क्रियकरण की प्रक्रिया इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होगी।