कैरव गांधी अपहरण कांड में बिहार से रहे तार, फरार स्कार्पियो मालिक ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किल

कैरव गांधी अपहरण कांड में बिहार से रहे तार, फरार स्कार्पियो मालिक ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 22, 2026, 2:53:00 PM

बिष्टुपुर स्थित एसएसपी आवास के पास से चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण को नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो उनका कोई पता चल सका है और न ही अपहरण में शामिल लोगों की गिरफ्तारी हो पाई है। यह मामला पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस की टीमें अब झारखंड से बाहर बिहार तक पहुंच चुकी हैं, जहां अपहरण में प्रयुक्त वाहन से जुड़ी अहम कड़ी सामने आई है।

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी बिहार के नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र स्थित नई पोखर इलाके में पंजीकृत है। यह वाहन राजशेखर नामक व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। इस जानकारी के बाद पुलिस की एक विशेष टीम नालंदा पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी शुरू की, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही वाहन मालिक फरार हो गया। बताया जा रहा है कि कई बार दबिश देने के बावजूद पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली और आरोपी अपनी गाड़ी के साथ लापता है।

मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी सोनारी थाना क्षेत्र में पूछताछ की। हालांकि, इस दिशा में भी कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी, जिससे अपहरण की साजिश या पीड़ित की लोकेशन का स्पष्ट संकेत मिल सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस घटना के पीछे निजी संबंध, आर्थिक लेन-देन या पुरानी दुश्मनी जैसी कोई वजह हो सकती है।

यह अपहरण 13 जनवरी को सर्किट हाउस इलाके के पास हुआ था, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। कोल्हान रेंज के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा द्वारा जल्द खुलासे के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन लगभग 192 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इससे पुलिस की कार्यशैली और जांच की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस बीच, कैरव गांधी के घर के बाहर लोगों का जमावड़ा और परिजनों की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। परिवार अब भी किसी ठोस खबर का इंतजार कर रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपी राजशेखर के पिता उपेंद्र सिंह राजगीर में ‘मारवाड़ी बासा’ नामक होटल का संचालन करते हैं। राजशेखर पहले नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में एक कंप्यूटर कोचिंग सेंटर चलाता था, जिसे विवादों के बाद बंद कर दिया गया था। उल्लेखनीय है कि नई पोखर इलाका पहले भी साइबर अपराधों के लिए बदनाम रहा है, जिससे इस अपहरण के पीछे किसी संगठित या अंतरराज्यीय गिरोह की भूमिका की आशंका और गहराती जा रही है।

लगातार हाई अलर्ट और छापेमारी के बावजूद मुख्य संदिग्ध का फरार रहना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। फिलहाल पुलिस का दावा है कि बिहार और झारखंड पुलिस के समन्वय से जांच तेज कर दी गई है और सभी संभावित पहलुओं पर कार्रवाई जारी है, लेकिन पीड़ित परिवार और शहरवासियों को अब भी ठोस परिणाम का इंतजार है।