देश में तेजी से बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच झारखंड के जमशेदपुर में पहाड़ी क्षेत्रों और नदियों के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होने जा रही है। 22 और 23 मई 2026 को मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के सभागार में होने वाले इस दो दिवसीय कार्यक्रम में पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
इस आयोजन का मार्गदर्शन जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय राजेंद्र सिंह और विधायक सरयू राय कर रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने पर राष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाना है।
आयोजकों का कहना है कि देश की नदियां और पर्वतीय क्षेत्र लगातार बढ़ते अतिक्रमण, अनियंत्रित खनन, शहरी विस्तार और प्रदूषण के दबाव में हैं। मौजूदा व्यवस्था में इनके संरक्षण के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधानों की कमी महसूस की जा रही है। इसी कारण संगोष्ठी में दो प्रस्तावित विधायी प्रारूपों; "भारतीय पर्वत संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम" तथा "नदी संरक्षण एवं पुनर्जनन अधिनियम" पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम में न्यायपालिका, पर्यावरण विज्ञान, वन प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश गोपाल गावड़ा, डॉ. पीयूष कांत पांडेय, प्रो. अंशुमाली, आईएफएस अधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी, यूनेस्को के पूर्व निदेशक डॉ. राम बूझ, दीपक परबतियार, विभूति देबरामा, बी. सत्यनारायण, संजय उपाध्याय, डॉ. एस.एन. पाठक, अधिवक्ता ए.के. कश्यप और डॉ. गोपाल शर्मा प्रमुख हैं।
संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों की राय और सुझावों के आधार पर विधेयकों का मसौदा अंतिम रूप दिया जाएगा। बाद में इन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि संसद में विचार कर इन्हें कानूनी स्वरूप दिया जा सके।
आयोजकों का मानना है कि नदियों और पहाड़ों की रक्षा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह देश की जल सुरक्षा, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में प्राकृतिक संसाधनों पर संकट और गहरा सकता है।