XLRI में EMSI का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, पर्यावरणीय उत्परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर होगा मंथन

XLRI में EMSI का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, पर्यावरणीय उत्परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर होगा मंथन

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 29, 2026, 3:55:00 PM

जमशेदपुर स्थित XLRI में आयोजित पर्यावरणीय उत्परिवर्तन एवं एपिजीनोमिक्स पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर झारखंड के राज्यपाल एवं राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच गहरे तथा नाजुक संबंध को रेखांकित किया। यह सम्मेलन जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के तत्वावधान में Environmental Mutagen Society of India (EMSI) द्वारा आयोजित किया गया है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि औद्योगिकीकरण, तीव्र शहरी विस्तार, बढ़ता प्रदूषण और जीवन-शैली में आए बदलावों के कारण आज मानव स्वास्थ्य के समक्ष नई और जटिल चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं। वायु, जल, मृदा और खाद्य पदार्थों के माध्यम से फैल रहा प्रदूषण मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिससे आनुवांशिक स्तर पर भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उभर रही हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके ठोस, व्यवहारिक और प्रभावी समाधान तलाशने की दिशा में भी सार्थक विमर्श करेगा। राज्यपाल ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे अपने शोध और निष्कर्षों को समाज के व्यापक हित से जोड़ें, ताकि उनका प्रत्यक्ष लाभ आम लोगों तक पहुँच सके।

झारखंड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री गंगवार ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने इच्छा जताई कि झारखंड के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में शामिल हों और देशभर के विद्यार्थी यहाँ अध्ययन के लिए आकर्षित हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान न रहकर समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का केंद्र बनना चाहिए। इसके लिए शोध, नवाचार और बहुविषयी अध्ययन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम यह संदेश देते हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने झारखंड को प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध जैव विविधता और ऊर्जावान युवा प्रतिभाओं से भरपूर राज्य बताते हुए कहा कि यहाँ प्रकृति और मानव के बीच संबंध सदियों से बना हुआ है। उन्होंने युवा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से जिज्ञासा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ अनुसंधान कार्य करने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाएँ वैज्ञानिक, बौद्धिक और सामाजिक दृष्टि से दूरगामी प्रभाव डालेंगी।