जमशेदपुर में पहली बार साहित्य का महाकुंभ, 9–11 जनवरी तक गोपाल मैदान में सजेगा पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव

जमशेदपुर में पहली बार साहित्य का महाकुंभ, 9–11 जनवरी तक गोपाल मैदान में सजेगा पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 03, 2026, 3:22:00 PM

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन जमशेदपुर में पहली बार एक भव्य साहित्य उत्सव का आयोजन करने जा रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन 9 से 11 जनवरी तक बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में होगा। साहित्य, कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को संरक्षित करने और उसे व्यापक समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह उत्सव जिले के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इस साहित्य उत्सव में देशभर से नामचीन लेखक, कवि, इतिहासकार, विचारक और सांस्कृतिक कर्मी शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित डॉ. जानुम सिंह सोय, हलधर नाग और डॉ. पुष्पेश पंत सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होंगे। इनके अलावा डॉ. नारायण उरांव, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. पार्वती तिर्की, डॉ. अशोक कुमार सेन, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, डॉ. हिमांशु बाजपेयी, डॉ. सुरिंदर सिंह जोधका, डॉ. नेहा तिवारी, जेरी पिंटो, नीलोत्पल मृणाल, चंद्रहास चौधरी, महादेव टोप्पो, संजय कच्छप, निरंजन कुजूर, रणेंद्र कुमार, रजा काजमी, बिक्रम ग्रेवाल, अक्षय बहिबाला, राहुल पंडिता, सौरव रॉय, प्रेमचंद उरांव, रविंद्र नाथ मुर्मू, यदुवंश प्रणय, अनुकृति उपाध्याय, जोबा मुर्मू, शताब्दी मिश्रा समेत अनेक रचनाकार मंच साझा करेंगे।

जिला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य साहित्य को आम लोगों से जोड़ना, उभरते हुए युवा लेखकों को मंच देना और पूर्वी सिंहभूम को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाना है। जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों और आम नागरिकों से इस उत्सव में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।

साहित्य के साथ कला और संस्कृति का संगम

साहित्यिक चर्चाओं के अलावा उत्सव में कई रंगारंग और रचनात्मक गतिविधियां भी होंगी। दर्शकों के लिए लाइव ग्लिटर आर्ट, पेंटिंग और पॉटरी का प्रदर्शन, लाइव बैंड, जनजातीय नृत्य से पारंपरिक स्वागत, नाट्य प्रस्तुति “लोहे का आदमी और लोहारिन”, स्थानीय छऊ नृत्य, जनजातीय खेलों की झलक और पुस्तक व कहानी स्टॉल विशेष आकर्षण रहेंगे।

तीन दिन, तीन अलग रंग

पहला दिन (9 जनवरी):
उद्घाटन समारोह के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। पहले दिन झारखंड की आदिवासी भाषाओं और साहित्य की वैश्विक दृष्टि, आदिवासी इतिहास, पालीएटिव केयर पर जेरी पिंटो की नई पुस्तक, “होड़ रोड़” कथा, मिट्टी की भाषा और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित सत्र आयोजित किए जाएंगे।

दूसरा दिन (10 जनवरी):
दूसरे दिन पुस्तकालयों को जन आंदोलन के रूप में देखने, कुड़ुख भाषा और साहित्य, इतिहास को नए दृष्टिकोण से समझने, लोकस्वर की परंपरा, समकालीन भारत में जाति, वर्ग और गांव की भूमिका तथा नीलोत्पल मृणाल के साहित्यिक योगदान पर विचार-विमर्श होगा।

तीसरा दिन (11 जनवरी):
अंतिम दिन द्विभाषिक लेखन, महाश्वेता देवी की आदिवासी केंद्रित रचनाओं की स्मृति, जंगल और समाज के संबंध, युवाओं से सीधा संवाद और सिनेमा व अनकही कहानियों पर केंद्रित सत्रों के साथ उत्सव का समापन किया जाएगा।

पूर्वी सिंहभूम का यह पहला साहित्य उत्सव न केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक ऊर्जा को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करेगा।