धनबाद:- देश का पेट भरने वाला अन्नदाता आज खुद सिस्टम की बेरुखी और मुनाफाखोरों की मनमानी का शिकार होने का आरोप लगा रहा है। धनबाद के टुंडी प्रखंड में किसानों को सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया तय कीमत से कई गुना अधिक दाम पर बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि 45 किलो की जिस यूरिया बोरी की सरकारी कीमत 266 रुपये 50 पैसे है, उसी यूरिया को खुले बाजार में 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। शिकायतों के बाद धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर फसल उगाने वाला किसान इन दिनों खाद की किल्लत और महंगी यूरिया से परेशान है। मामला धनबाद के टुंडी प्रखंड का बताया जा रहा है, जहां यूरिया की कालाबाजारी की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि दुकानदार सरकारी दर पर यूरिया देने के बजाय मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।
अब जरा इस लूट का पूरा गणित समझिए...
सरकार की ओर से 45 किलो यूरिया की एक बोरी की कीमत 266 रुपये 50 पैसे तय है। यानी प्रति किलो यूरिया की कीमत करीब 5 रुपये 92 पैसे पड़ती है। लेकिन आरोप है कि बाजार में यही यूरिया किसानों को 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। यानी सब्सिडी का लाभ किसानों तक पहुंचने के बजाय मुनाफाखोरों की जेब में जाने का आरोप लग रहा है। दुकानदारों द्वारा महंगे कीमत पर बेचा जाता यूरिया और आरोप लगाते।
किसानों की मजबूरी भी इन मुनाफाखोरों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गई है। फसल को समय पर खाद नहीं मिली तो उत्पादन प्रभावित होने का डर रहता है। ऐसे में किसान मजबूरी में दुकानदारों की तय की गई मनमानी कीमत चुकाने को मजबूर हो रहे हैं।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि कुछ दुकानदारों ने अधिक कीमत वसूलने के पीछे अधिकारियों और बिचौलियों तक कमीशन पहुंचाने की बात कही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में कुछ ऐसे लोगों द्वारा भी खाद बिक्री किए जाने की शिकायत है, जिनके लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
सवाल यह है कि अगर टुंडी के बाजारों में लंबे समय से यूरिया की कालाबाजारी चल रही थी, तो कृषि विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे? क्या किसानों की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया? और क्या इस पूरे खेल में सिर्फ दुकानदार ही जिम्मेदार हैं या फिर जांच की आंच उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जिनकी निगरानी में यह कारोबार चलने का आरोप है?
वहीं, लगातार शिकायतों और किसानों के आक्रोश के बाद अब धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने मामले को गंभीरता से लिया है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को सघन जांच और छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही साफ कहा गया है कि किसानों के हक के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति या दुकानदार को बख्शा नहीं जाएगा।
टुंडी में यूरिया की कालाबाजारी के आरोपों ने एक बार फिर सरकारी सब्सिडी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीसी के सख्त आदेश के बाद अब किसानों को कार्रवाई की उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जांच सिर्फ दुकानों तक सीमित रहेगी या फिर इस कथित काले कारोबार को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचेगी।
धनबाद से नीति की रिपोर्ट