केंदुआडीह : गैस रिसाव पर काबू की कोशिश तेज, नाइट्रोजन इंजेक्शन से हालात सुधारने में जुटी PMRC की टीम

केंदुआडीह : गैस रिसाव पर काबू की कोशिश तेज, नाइट्रोजन इंजेक्शन से हालात सुधारने में जुटी PMRC की टीम

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 18, 2025, 5:28:00 PM

धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी गैस रिसाव ने प्रशासन और वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। प्रभावित इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है, वहीं प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। हालात को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी उपायों के साथ विशेषज्ञों की टीम मौके पर तैनात है। इसी क्रम में पेट्रो माइंस रिसर्च सेंटर (पीएमआरसी) की टीम ने गुरुवार से नाइट्रोजन इंजेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पीएमआरसी के प्रबंध निदेशक प्रो. बी.सी. पाणिग्रही ने बताया कि नाइट्रोजन डालने से पहले पूरी वैज्ञानिक पद्धति का पालन किया गया। सबसे पहले छह इंच का बोरहोल किया गया, इसके बाद तीन इंच का बोरहोल बनाकर गैसिंग की गई और फिर नाइट्रोजन इंजेक्ट की गई। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान गैस कंट्रोल की विजन मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि रिसाव पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो पा रहा है।

उनके अनुसार, नियंत्रण की रफ्तार अंदर की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, क्योंकि भूमिगत हालात सीधे दिखाई नहीं देते। तकनीकी अनुमान और आंकलन के आधार पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यदि भीतर कोई गंभीर तकनीकी बाधा नहीं हुई, तो स्थिति जल्द सामान्य हो सकती है, अन्यथा इसमें अधिक समय भी लग सकता है। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन इंजेक्शन से ऑक्सीजन का स्तर घटता है और ठंडा प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे अंदर चल रही रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

प्रो. पाणिग्रही ने आगे बताया कि इलाके में कुल तीन स्थानों पर बोरहोल किया जाना प्रस्तावित है। पहला बिंदु पूरा हो चुका है, दूसरे स्थान पर शीघ्र काम शुरू किया जाएगा, जबकि तीसरा बिंदु सीमा क्षेत्र के पास होने के कारण अंतिम चरण में लिया जाएगा। जांच के दौरान मिथेन गैस की मौजूदगी भी पाई गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भीतर की गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं हैं। क्षेत्र में सामान्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसें पाई जाती हैं।

पीएमआरसी के मुख्य वैज्ञानिक नागेश्वर शाहा ने बताया कि फायर कंट्रोल की स्थिति परखने के लिए विशेषज्ञों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब हालात काफी हद तक नियंत्रण में हैं और नाइट्रोजन भरने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से जारी है। अगले 72 घंटे तक लगातार टैंकर चलाकर परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इधर, जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।