धनबाद में धंसी धरती, टंडाबाड़ी बस्ती के 10 घर जमींदोज, दहशत में लोग

धनबाद में धंसी धरती, टंडाबाड़ी बस्ती के 10 घर जमींदोज, दहशत में लोग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 24, 2026, 1:58:00 PM

झारखंड के धनबाद जिले में स्थित बाघमारा प्रखंड के सोनारडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंडाबाड़ी बस्ती में गुरुवार रात एक बार फिर जमीन धंसने की गंभीर घटना सामने आई। इस हादसे में करीब दस मकान पूरी तरह धरती में समा गए, जबकि चार लोग घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिसका इलाज असर्फी अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, देर रात अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद जमीन धंसने लगी। स्थिति इतनी भयावह थी कि लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे। हालांकि, कुछ लोग मलबे में दब गए, जिन्हें ग्रामीणों ने मिलकर बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी और बीसीसीएल के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

घटना के चश्मदीद मनोज सिंह ने बताया कि वे घर में खाना बनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक जोरदार आवाज आई और जमीन हिलने लगी। किसी तरह बाहर निकलकर उन्होंने अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ ही क्षणों में आसपास के कई घर धंस गए। वहीं, एक अन्य प्रभावित निवासी नरेश भुइयां ने कहा कि इलाके में पहले से ही भय का माहौल था और इस हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया।

स्थानीय निवासियों ने इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि टंडाबाड़ी में इस तरह का यह तीसरा बड़ा हादसा है। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से हो रही कोयला खनन गतिविधियों के कारण जमीन भीतर से कमजोर हो चुकी है, जिसके चलते बार-बार ऐसे हादसे हो रहे हैं।

प्रशासन की ओर से मौके पर पहुंचे अंचलाधिकारी गिरजा नंद किस्कू ने बताया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। लगभग 21 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की योजना है। इसके अलावा, क्षेत्र के एक स्कूल को भी स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने टंडाबाड़ी बस्ती के लोगों के सामने गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है। अब क्षेत्र के लोग प्रशासन से स्थायी समाधान और सुरक्षित पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं।