मकर संक्रांति के पावन पर्व पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के भोर से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा। हर ओर “हर हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
पर्व के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ का भव्य और विशेष श्रृंगार किया गया। ब्रह्ममुहूर्त में कांचा जल अर्पण के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ, जिसके बाद निर्धारित परंपरा के अनुसार सरकारी पूजा संपन्न कराई गई। सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत बाबा को तिल और गुड़ अर्पित किए गए, जो मकर संक्रांति की पूजा का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
पूजा-अर्चना के उपरांत बाबा भोलेनाथ को तिल-गुड़ मिश्रित खिचड़ी का विशेष भोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा को तिल समर्पित करने के बाद ही श्रद्धालु स्वयं तिल या उससे बने पदार्थों का सेवन करते हैं। इसी दिन से माघ माह की शुरुआत के साथ बाबा को पूरे महीने तिल, दही और खिचड़ी का भोग अर्पित करने की परंपरा भी प्रारंभ हो जाती है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार माघ मास में सूर्य उत्तरायण रहते हैं, इसलिए इस अवधि में की गई पूजा और भोग का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मकर संक्रांति के पुण्यकाल में किए गए अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माने जाते हैं, इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बाबा धाम में खिचड़ी भोग की तैयारी परंपरागत रूप से श्रृंगारी परिवार द्वारा की जाती है। पूरी शुद्धता और विधि-विधान का पालन करते हुए देशी चावल, दाल और शुद्ध घी से खिचड़ी बनाई जाती है। यह भोग केवल बाबा बैद्यनाथ ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं को भी अर्पित किया जाता है।
मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्ति, परंपरा और आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया।