बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के बीच देवघर का पेड़ा और चूड़ा लंबे समय से विशेष पहचान रखते हैं। मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालु इन पारंपरिक उत्पादों को प्रसाद के रूप में खरीदना पसंद करते हैं। खासकर देवघर-बासुकीनाथ मार्ग पर स्थित घोरमारा का पेड़ा अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण अलग पहचान बना चुका है। हालांकि इस बार सावन से पहले स्थानीय कारोबारियों के सामने कई चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं।
घोरमारा क्षेत्र के मिठाई व्यवसायियों का कहना है कि यहां का पेड़ा उद्योग हर साल करोड़ों रुपये का व्यापार करता है। लेकिन पिछले दो वर्षों से दुमका-देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य ने इस कारोबार की रफ्तार को प्रभावित किया है। सड़क निर्माण के कारण कई बार यातायात व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु घोरमारा मार्ग से नहीं गुजर पाए और दुकानदारों की बिक्री पर असर पड़ा।
व्यापारियों के अनुसार, पिछले वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से निर्माणाधीन सड़क पर आम आवागमन सीमित कर दिया था और श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि घोरमारा के बाजार तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई और पेड़ा कारोबार को नुकसान झेलना पड़ा।
सावन माह के निकट आने के साथ ही स्थानीय व्यवसायियों की चिंता फिर बढ़ गई है। उनका मानना है कि सड़क निर्माण कार्य अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में यदि इस बार भी श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाती है, तो बिक्री पर फिर से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अब तक जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी ने भी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडरों की उपलब्धता कम होने के कारण कई दुकानदारों को बाजार से ऊंची कीमत पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। पहले जहां एक सिलेंडर अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल जाता था, वहीं अब उसके लिए दोगुनी या उससे अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।
घोरमारा पेड़ा संघ के अध्यक्ष अश्वनी मंडल ने बताया कि वर्तमान में प्रशासन द्वारा निर्धारित बिक्री दर 360 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है। उनका कहना है कि बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा मूल्य पर कारोबार करना कठिन हो रहा है। इसलिए प्रशासन से प्रति किलो कम से कम 50 रुपये की बढ़ोतरी करने का आग्रह किया गया है।
व्यापारी संगठनों का यह भी कहना है कि सावन के दौरान पेड़ा कारोबार क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन जाता है। ऐसे में गैस आपूर्ति, यातायात व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में प्रशासन को विशेष कदम उठाने चाहिए, ताकि व्यवसायियों को राहत मिल सके।
उल्लेखनीय है कि घोरमारा में करीब 200 से 250 परिवार प्रत्यक्ष रूप से पेड़ा व्यवसाय पर निर्भर हैं। सावन के दौरान होने वाली बिक्री इन परिवारों की वार्षिक आय का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। यही वजह है कि स्थानीय कारोबारियों की निगाहें अब प्रशासन के आगामी फैसलों पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि इस वर्ष सावन में उनका कारोबार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।