झारखंड में लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान खासा परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि सरकार ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है, फिर भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
देवघर जिले में तापमान इन दिनों 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में सुबह की शिफ्ट खत्म होने के बाद जब छात्र घर लौटते हैं, तब भी तापमान 35 डिग्री के आसपास बना रहता है, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है, जिसे ‘वाटर बेल’ नाम दिया गया है। ऐसे में इस व्यवस्था के तहत स्कूलों में हर घंटे घंटी बजाई जाएगी, जिसके बाद बच्चों को पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, उन्हें ओआरएस और नींबू पानी जैसे तरल पदार्थ भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार के अनुसार, कई बच्चे बिना नाश्ता किए स्कूल पहुंचते हैं, जिससे गर्मी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने का खतरा और बढ़ जाता है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की याद दिलाना और उन्हें डिहाइड्रेशन से सुरक्षित रखना है।
इसके अलावा स्कूलों में पंखे और कूलर जैसी सुविधाओं को दुरुस्त करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए समय-समय पर मेडिकल जांच की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि अप्रैल महीने में ही जिस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है, उससे आने वाले महीनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में ‘वाटर बेल’ जैसी पहल बच्चों को कितनी राहत दे पाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।