बोकारो के भू-अर्जन अधिकारी को 455 दिन की देरी पड़ी भारी, HC ने रिव्यू याचिका ठुकराई

बोकारो के भू-अर्जन अधिकारी को 455 दिन की देरी पड़ी भारी, HC ने रिव्यू याचिका ठुकराई

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 09, 2026, 1:36:00 PM

रांची से आई एक अहम खबर में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उसकी ओर से दाखिल रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी की भूमिका को गंभीर लापरवाही मानते हुए उन पर एक लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।

मामले की सुनवाई जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में हुई, जहां कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका न तो कानूनी दृष्टि से टिकाऊ थी और न ही किसी वास्तविक त्रुटि के सुधार के लिए लाई गई थी। अदालत के अनुसार, यह पूरी कवायद सिर्फ न्यायिक आदेश के अनुपालन से बचने और अवमानना की कार्यवाही को टालने के उद्देश्य से की गई थी।

कोर्ट के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने करीब 455 दिनों की असामान्य देरी के बाद यह याचिका तब दाखिल की, जब संबंधित जमीन मालिक ने पहले के आदेश का पालन न होने पर अवमानना मामला शुरू कर दिया था। इस पृष्ठभूमि में अदालत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि बोकारो के भू-अर्जन पदाधिकारी दो सप्ताह के भीतर अपनी निजी राशि से एक लाख रुपये का भुगतान जमीन मालिक लखी बाउरी को करें। समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं होने की स्थिति में कोर्ट ने इस मामले को संबंधित खंडपीठ के समक्ष रिपोर्ट करने की चेतावनी भी दी है।

यह विवाद बोकारो जिले के मौजा राधानगर स्थित लगभग दो एकड़ जमीन से जुड़ा है। वर्ष 1988-89 में यह जमीन सरकारी योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थी लखी बाउरी को आवंटित की गई थी। बाद में इसी भूमि को रेलवे साइडिंग और पेट्रोलियम डिपो के निर्माण के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को सौंप दिया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में जमीन मालिक को नियमानुसार मुआवजा नहीं दिया गया।

राज्य सरकार ने अदालत में यह दलील दी कि संबंधित भूमि गैर-मजरुआ थी और बीपीसीएल द्वारा जमा की गई 91.13 लाख रुपये की राशि मुआवजा नहीं, बल्कि सलामी और लगान के रूप में थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब बीपीसीएल मुआवजे के बराबर रकम सरकार के पास जमा कर चुका है, तो उसे सही और वैध जमीन मालिक तक पहुंचाना राज्य की जिम्मेदारी है।