बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस संगठन ने आत्ममंथन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में आज कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में दोपहर 3 बजे से एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई है। यह बैठक प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के बीच पहली औपचारिक चर्चा होगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, पूर्व सीएलपी नेता, सभी सांसद, विधायक और सभी 61 कांग्रेस प्रत्याशी शामिल होंगे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन की वजहों का पता लगाना और आगे की रणनीति तय करना है। बिहार चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिली हैं, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यही कारण है कि समीक्षा बैठक में न केवल जीते हुए छह विधायक, बल्कि सभी 61 प्रत्याशियों को अपने-अपने क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पेश करनी होगी। इन रिपोर्टों में यह स्पष्ट करना होगा कि किस कारण हार हुई, स्थानीय स्तर पर कौन-से मुद्दे प्रमुख रहे, किन वर्गों का समर्थन कमजोर पड़ा और संगठनात्मक ढांचे में कहां कमियां रहीं।
इन रिपोर्टों के आधार पर कांग्रेस आने वाले समय में अपने संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति में आवश्यक सुधार लाने की दिशा में कदम उठाएगी। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ चुके नेटवर्क को नए सिरे से खड़ा करना जरूरी है।
इसी बीच, कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के मामलों पर भी सख्ती दिखाई है। पार्टी ने 43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा था और जांच के बाद पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए सात नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। निष्कासित नेताओं में आदित्य पासवान, शकीलुर रहमान, राजकुमार शर्मा, राजकुमार राजन, कुंदन गुप्ता, कंचना कुमारी और रवि गोल्डन शामिल हैं।
आज की बैठक से कांग्रेस को उम्मीद है कि वह अपनी कमजोरियों की पहचान कर भविष्य की सियासी लड़ाई के लिए खुद को नई ऊर्जा के साथ तैयार कर सकेगी।