19 दिन से अनशन, अब बैरिकेडिंग तोड़ लोकभवन की ओर बढ़े PHD होल्डर्स, चिराग ने लिखी थी CM सम्राट को चिट्ठी

बिहार की राजधानी पटना में PhD होल्डर्स का आंदोलन जारी है। अब आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए PhD होल्डर्स ने लोकभवन तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी आर ब्लॉक चौराहे के पास जुटे हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

बिहार की राजधानी पटना में PhD होल्डर्स का आंदोलन जारी है। विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने समेत कई विभिन्न मांगों को लेकर पीएचडी होल्डर्स पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं। अब आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए PhD होल्डर्स ने लोकभवन तक मार्च निकाला।  प्रदर्शनकारी आर ब्लॉक चौराहे के पास जुटे हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। पटना प्रशासन ने आर ब्लॉक और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी।  आर ब्लॉक चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है। स्टेशन की तरफ से आर ब्लॉक आने वाला रास्ता भी बंद कर दिया गया है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। 

पटना के आर ब्लॉक चौराहे पर बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। कई कैंडिडेट्स बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग को पार कर आगे जाने का प्रयास किया। मौके पर पुलिस बल प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में जुटा है।  आगे बढ़ने को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच लगातार खींचतान की स्थिति बनी हुई है। 

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुमुद पटेल भी आर ब्लॉक चौराहे पर पहुंच गए हैं। वह व्हीलचेयर पर वहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि कुमुद पटेल समेत कई पीएचडी होल्डर्स पिछले 19 दिनों से अनशन पर हैं। रोते हुए कुमुद पटेल ने कहा कि सरकार चाहती है कि मैं मर जाऊं। उनकी स्थिति देखकर मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में भी नाराजगी दिखाई दी। छात्र अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं और उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। 

प्रदर्शन कर रहे शोधार्थियों ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने की मांग की। शोधार्थियों ने नियुक्तियों में डोमिसाइल यानी निवास नीति लागू करने की भी मांग की है। आंदोलनकारियों ने वर्षों से विश्वविद्यालयों में कार्यरत गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को सेवा नियमितीकरण का लाभ देने की मांग भी उठाई।  आंदोलन कर रहे PhD होल्डर्स का कहना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रोफेसरों की नियुक्ति में UGC के निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही वे प्रोफेसर नियुक्ति में उम्र सीमा बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं।

वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लिखी चिट्ठी में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 पर पुनर्विचार की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले छात्रों, अभ्यर्थियों, अतिथि शिक्षकों, विश्वविद्यालयों और विषय विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जाए। 

पीएचडी होल्डर्स की मांगें?

असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC Regulation 2018 और Table 3A लागू किया जाए.

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की प्रक्रिया नियमित और स्थायी हो, यानी खाली पदों पर जल्द नियमित नियुक्ति की जाए.

अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाकर 55 साल की जाए.

बिहार में प्रभावी डोमिसाइल नीति लागू की जाए.

बिहार स्टैच्यूट 2026 में बताई जा रही विसंगतियों को दूर किया जाए और योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति में उचित मौका मिले. गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर से जुड़े मामलों में सेवा सुरक्षा या उचित समायोजन किया जाए.

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वायत्तता में कथित हस्तक्षेप बंद किया जाए.

विश्वविद्यालयों में खाली Assistant Professor के पदों पर जल्द नियुक्ति की जाए.